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खेत से मिलीं भारत-पाक युद्ध में शहीद जवानों की अस्थियां!
जम्मू/ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2013 02:00 AM IST
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जम्मू में ज्यौड़ियां के तरोटी गांव में एक खेत से बुधवार की शाम भारी मात्रा में मिले पुराने गोला-बारूद, खाने की प्लेटें और मानव अस्थियां हमारे उन शहीद जवानों की हैं, जो वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।
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जहां से कंकालों के टुकड़े मिल रहे हैं, वहां युद्ध के दौरान गोरखा रेजिमेंट के जवान तैनात थे। ऐसा दावा उस समय सेना में तैनात रिटायर जवानों का है।
स्थानीय बुजुर्ग भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि यहां डटकर हमारे सैनिक पाकिस्तान से लोहा लिया करते थे। इसलिए अस्थियों का सम्मान से अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। यहां वे पांव तले रौंदे जा रहे हैं। यह शहीद सैनिकों का अपमान है।
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बुधवार की शाम तरोटी गांव के खेत में भारी मात्रा में पुराने गोला-बारूद मिलने के बाद लगातार ग्रामीण वहां खुदाई कर रहे हैं। वहां काफी मात्रा में मानव अस्थियां मिल रही हैं।
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1965 में सेना में बतौर हवलदार तैनात बुजुर्ग केसर बराल का कहना है कि ये अस्थियां कहां से आईं और किनकी है, इस ओर किसी का ध्यान नहीं हैं।
कुछ समय पहले भी खेत की जुताई के समय अस्थियां मिली थी, तब लोग अनुमान लगा रहे थे कि अतीत में यहां कब्रिस्तान रहा होगा। लेकिन यह रणभूमि थी। भारी मात्रा में गोला-बारूद और प्लेटें मिलने से यह साफ हो रहा है। इस जगह पर 1965 में भारतीय जवानों के बंकर हुआ करते थे।
युद्ध के समय सेना में सूबेदार रह चुके स्थानीय बुजुर्ग खेमचंद का कहना है कि पाक सैनिकों ने ज्यौड़िया से करीब तेरह किलोमीटर दूर गांव नाईवाला तक भारतीय सैनिकों को खदेड़ दिया था।
रास्ते में जो भी सैनिकों या बंकर मिलने सबको तबाह कर दिया था। उस स्थल के आसपास आज भी बंकर हैं। जाहिर है अस्थियां शहीद सैनिकों की हैं।