ग्राउंड रिपोर्ट लद्दाख: आंदोलन के असर और कारगिल-लेह के फेर ने उलझा दिए समीकरण, त्रिकोणीय मुकाबला
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विस्तार
लद्दाख लोकसभा क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दो माह से ज्यादा चला आंदोलन असर दिखा रहा है। लेह जाने पर इसका असर खूब दिखाई देता है और गांव के एक युवा से लेकर बुजुर्ग तक सबकी जुबान पर छठी अनुसूची का नाम होता है। पिछले दो चुनाव केंद्रशासित प्रदेश की मांग पर लड़े और जीते गए। अब छठी अनुसूची इसमें अहम मुद्दे के रूप में जुड़ गया है। लोगों का कहना है कि भाजपा की केंद्र सरकार ने वादा पूरा नहीं किया और अब कांग्रेस दम भर रही है। यहां चुनाव में क्षेत्रीयता भी मुद्दा है। कारगिल और द्रास के लोगों को लगता है कि उनका नुमाइंदा इस बार लेह से न होकर उनके क्षेत्र का होना चाहिए। कारगिल निवासी निर्दलीय प्रत्याशी हनीफा जान भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के कारगिल जिलाध्यक्ष भी रहे चुके हैं। लद्दाख में भाजपा ने सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल का टिकट काटकर ताशी ग्यालसन को उतारा है तो कांग्रेस ने टी नामग्याल को। पिछले दो बार से लद्दाख सीट भाजपा के कब्जे में है।
कश्मीर के सोनमर्ग से खूबसूरत वादियों से गुजरकर कारगिल के द्रास क्षेत्र में प्रवेश मिलता है। हालांकि, रास्ता दुर्गम है। कारगिल की सीमा शुरू होते ही छोटा सा गांव मटाइन है। यहां चुनाव के बारे में पूछने पर बुजुर्ग मतदाता महबूब और मुस्तफा बोले, हम तो ऊपर वाले के भरोसे हैं। बर्फ पड़ने पर ज्यादातर लोग घर छोड़कर चले जाते हैं। किसी नेता ने यहां की सुध नहीं ली और विकास भी नहीं हुआ।
व्यापार में महिलाओं का अच्छा स्थान
लेह के आसपास के गांवों और लेह शहर में खास बात यह भी दिखी कि दुकानों पर महिला संचालकों की संख्या अच्छी-खासी थी। लोमायुरू, खलसी व निम जैसे गांवों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर महिलाएं ज्यादा दिखीं। पद्मा ने बताया कि यहां पुरुष अधिकांश फौज में हैं या रिटायर हो गए हैं। ऐसे में प्रतिष्ठानों को महिलाएं ही चलाती हैं। लेह के नए बस अड्डे के पास किताब की दुकान चलाने वाली सोनम लाडौल के पति एयरफोर्स में हैं। वह भी छठी अनुसूची को ही प्रमुख मांग मानती हैं। पास की दुकान पर ही बैठे आंचुक का कहना है कि देश में काफी काम हुए हैं, बेहतर हो कि उनकी मांग भी मान ली जाए।
मुकाबला कारगिल और लेह का
लद्दाख क्षेत्रफल के हिसाब से देश की सबसे बड़ी लोकसभा सीट है। कारगिल और द्रास इसके अहम हिस्से हैं। द्रास कस्बे में थाने के सामने चाय दुकान पर कुछ बुजुर्ग और युवा मिले। उनमें से एक मो. शमीम ने कहा कि इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन को ही जम्मू-कश्मीर व लद्दाख की सीटें मिलेंगी। पास में ही बैठे गुलाम कादिर ने भी हां में हां मिलाई। यहां सबका कहना था कि उनके क्षेत्र के लिए छठी अनुसूची की मांग अहम है। कांग्रेस इसे पूरा करने का वादा कर रही है तो उस पर भरोसा करना चाहिए।
कुछ युवा मतदाताओं ने छठी अनुसूची के साथ रोजगार की बात भी उठाई। हालांकि कहते हैं कि वे इस बार कारगिल क्षेत्र के प्रत्याशी का साथ देंगे। इसलिए निर्दलीय के साथ हैं। कारगिल शहर में भी व्यापारी मो. हसन सोनम वागंचुक की मांगों के साथ हैं, लेकिन कहते हैं कि सांसद उनके क्षेत्र से होना चाहिए।
कारगिल में युवा वसीम ने कहा कि वह पहली बार वोट देंगे और सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थक हैं। लेह से कुछ दूरी पर फ्यांग गांव में ही वागंचुक रहते हैं। उनके गांव से कुछ दूर पहले लेह एयरपोर्ट के बाहर खड़े चो का कहना है कि सोनम उनके हक के लिए लड़ रहे हैं। सभी को साथ देना चाहिए।
बाजार में खूब दिखे भाजपा व कांग्रेस के झंडे
लेह पहुंचने के लिए सड़क के रास्ते घने पहाड़ों के बीच से गुजारना पड़ता है। गांवों में कुछ जगहों पर तो लेह शहर में पहुंचते ही सड़क के दोनों किनारे दुकानों और घरों के ऊपर भाजपा और कांग्रेस के खूब झंड़े लगे हैं। इनमें भाजपा के झंड़े ज्यादा दिखाई देते हैं। टैक्सी चलाने वाले तंजिन नामग्याल दोनों ही पार्टियों से नाराज नजर आते हैं। कहते हैं कि पहले तो कांग्रेस ही थी लेकिन उन्होंने भी क्या किया था। अब भाजपा वाले वादे से मुकर गए। पास के ही गांव के लारडो निवास नामग्याल का कहना हे कि विकास के साथ विनाश नहीं आना चाहिए।
सबसे बड़ा मुद्दा छठी अनुसूची और रोजगार
लेह क्षेत्र में आते ही हर गांव के बाहर विशेष प्रार्थना चक्र लगा नजर आता है, जिन पर मंत्र लिखे होते हैं। यहां मंत्र लिखे छोटे झंडे भी दिखते हैं। मूलबैक गांव के थसगांम ने कहा कि छठी अनूसची के विशेष अधिकार जनता को मिलने चाहिए। गांव खलसी के सोनम मुरूप भी मानते हैं कि विशेष अधिकार का मुद्दा लोगों की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। हालांकि कहते है कि भाजपा प्रत्याशी ने स्थानीय स्तर पर काफी काम कराया है। कूरियर सर्विस वाले करमा आंचुक का मानना है कि अग्निवीर भी यहां पर एक मुद्दा होगा।
क्या है छठी अनुसूची
छठी अनुसूची के किसी भी इलाके में अलग तरह की स्वायत्तता होती है। जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा होने पर लद्दाख के पास यह विशेष अधिकार था। इसके अलावा पूर्ण राज्य की मांग, लोक सेवा आयोग और लद़्दाख के लिए एक और संसदीय सीट की मांग भी प्रमुख है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लेह में इन मांगों को लेकर हजारों लोगों के साथ धरना दिया था।