मुफ्ती सरकार में रहे मंत्री ने भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा
मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार में भाजपा कोटे से वित्त राज्यमंत्री बने निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला और आरोप लगाए कि कश्मीर के समक्ष कर्मभूमि जम्मू को सरेंडर कर दिया है। जम्मू को नजरअंदाज करके कश्मीर की भाषा बोली जा रही है। उन्होंने भाजपा के सभी नेताओं और मंत्रियोें को खुली चर्चा करने की भी चुनौती दी।
प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान उधमपुर के विधायक पवन गुप्ता ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने कश्मीर के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि वह अब नई विचाराधारा के साथ चल रही है। भाजपा अब वह भाजपा नहीं रही, जो अपनी विचारधारा के लिए जानी जाती है। जब वह भाजपा की टिकट के बगैर चुनाव जीते तो कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके घर का दरवाजा खटखटाया।
साथियों ने भी कहा कि उनका परिवार संघ से जुड़ा है। विचारधारा भी वही है और वह मंत्री बन जाएं। मंत्री बनने के दौरान भी उन्होंने कई नोट लिखे, लेकिन पब्लिक में नहीं आ पाए। कुं ठित होता रहा। कश्मीर में सरकार के विरोध के लिए सशक्त राजनीतिक दल हैं, जबकि जम्मू में एकमात्र भाजपा से लोगों को विश्वास था।
पीएम मोदी की नियत पर भी उठाए सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कटड़ा के दौरे में केवल कश्मीरियत की बात की। डोगरी की कोई बात नहीं की। जम्मू को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। वह जम्मू के कुछ बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर जम्मू का पक्ष सड़कों पर रखेंगे। विधानसभा में उनका विरोध रहेगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में चार डीएमयू ट्रेनें दी गईं, जबकि जम्मू से उधमपुर के बीच कोई ट्रेन नहीं शुरू की। कई बार मांग करने के बाद भी केंद्र ने उधमपुर और कटड़ा के निवासियों को नजरअंदाज किया। श्री माता वैष्णो देवी में हेलीकाप्टर सेवा पर कर बढ़ाए जाने का भी उन्होंने विरोध जताया, लेकिन भाजपा के ही कुछ मंत्रियों ने उनकी इस आवाज को दबा दिया।
कश्मीर में एक तरफ से कहा जाता है कि हालात ठीक नहीं है। नगर निगम के चुनाव नहीं हो सकते हैं। एक तरफ से अफस्पा हटाने और बंकर हटाने का काम चल रहा है। भाजपा को पता है कि जम्मू के लोग समझ चुके हैं कि उनसे धोखा हुआ है।
इसलिए अपनी हार की संभावनाओं के कारण चुनावों को स्थगित किया गया। वह जम्मू की सशक्त आवाज को लेकर आगे बढ़ेंगे। भाजपा ने ही डिलीमिटेशन, अफस्पा नहीं हटाने, एक निशान एक विधान की आवाज बुलंद की। अब वही मंत्री दो झंडे लगाकर चल रहे हैं। अब वह मानसिक तौैर पर आजाद हैं और सरकार की जम्मू विरोधी नीतियों का जमकर विरोध करेंगे।