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दोनों तरफ के कश्मीर को देनी होगी स्वायत्तता: फारूक

Mon, 09 May 2016 07:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 09 May 2016 07:31 PM IST
सार

  • बोले, सरहद को शांति रेखा में तब्दील करें
  • खाद्य सुरक्षा कानून जनहित में नहीं, संशोधन जरूरी

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farooq abdullah pitches for autonomy for divided Kashmir
- फोटो : PTI

विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सरहद के दोनाें तरफ के कश्मीर को स्वायत्तता देकर समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है। लगभग सात दशक से जम्मू-कश्मीर की समस्या बरकरार है। स्वायत्तता देने में और देरी करना घातक होगा।

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राजौरी और पुंछ जिलाें में तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन बुद्धल में जनसभा को संबोधित करते हुए डा. फारूक ने कहा कि सरहद से सटे दोनों मुल्काें को विभाजन की रेखा को शांति रेखा में तब्दील करना होगा।
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सात दशक में कई युद्घ हुए और आए दिन तनातनी होती रहती है। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के लोगाें की समस्याएं बढ़ती चली गईं। ढाई दशक से जम्मू-कश्मीर के हालात नाजुक बने हुए हैं।
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सरहद को शांति रेखा में तब्दील करें

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‌रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला - फोटो : FILE PHOTO

सरहद पर नरमी लानी होगी ताकि दोनों मुल्काें के बीच आर्थिक अवसर खुल सकें। इसका सीधा लाभ जम्मू-कश्मीर की अवाम को होगा। डा. फारूक ने कहा कि स्वायत्तता को खारिज करने की वजह से ही वर्तमान हालात बने। यदि इसमें और देरी की गई तो रियासत के हित प्रभावित होंगे।

उन्होंने डेढ़ दशक पूर्व राज्य विधानसभा में पारित किए गए प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने से प्रेरित था। उन्हाेंने केंद्र पर प्रहार करते हुए कहा देश में नफरत की राजनीति की जा रही है।

जबकि भारत हर मजहब को समाहित कर एक समग्र विचारधारा का नाम है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एनएफएसए) पर कहा कि पूर्ववर्ती नेकां सरकार ने इस एक्ट को लागू नहीं किया, क्योंकि यह जरूरतमंदों के हित में नही है। सरकार को एक्ट में संशोधन करना चाहिए।

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