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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   children giving exam for getting adopt

गोद लेने के लिए बच्चों को देना पड़ रहा इम्तिहान

Mon, 24 Feb 2014 02:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कठुआ
अमर उजाला ब्यूरो/कठुआ Updated Mon, 24 Feb 2014 02:33 PM IST
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children giving exam for getting adopt

संस्थाओं द्वारा बच्चों को गोद लेने का चलन नया नहीं है, लेकिन इसके लिए परीक्षा का आयोजन करना कहां तक सही है। बच्चों को परीक्षा में बैठाकर टाप रहने वालों को गोद लेना समझ में आता है, लेकिन जो बच्चे रह गए उनका क्या।

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उनके भविष्य की चिंता कौन करेगा। संस्था द्वारा रविवार को आयोजित परीक्षा दे रहे छात्रों के मन में यह सवाल जरूर उठा होगा। लोगों के मन में भी यह सवाल कई बार तैरा होगा। सवाल उठना लाजिमी भी है।
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हर साल संस्था परीक्षा का आयोजन कर बीस बच्चों को गोद लेती है, लेकिन जो बच्चे परीक्षा में अपने को टाप बीस में नहीं ला पाए, उनके भविष्य का क्या। आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठाया जाता है।
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नौवीं या उससे आगे की कक्षा के बच्चे को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं है। इससे तो ऐसा ही होगा कि बेहतर परिणाम वाले बच्चों को गोद लेकर उनका खर्च उठा लिया जाएगा, जिससे संस्था का मान भी बना रहेगा और बच्चों को गोद लेने की परंपरा भी, लेकिन ऐसा अब तक किसी ने नहीं सोचा। लेकिन यह सवाल विचारणीय है।
शायद जवाब यही काफी है, कुछ नहीं से बीस ही अच्छे।

क्या कहती है संस्था
सरकार से फंड नहीं मिलता है। ऐसे में सभी को गोद ले पाना संभव नहीं है। कई बार बच्चे किताबें ले जाते हैं, लेकिन उसके बाद पढ़ाई के लिए नहीं आते। ऐसे में संस्था को भी अपना खर्च देखकर ही कार्य करना पड़ता है। दूसरा प्रतियोगिता के माध्यम से केवल इच्छा बल को देखा जाता है। परीक्षा गोद लेने का पैमाना नहीं है।
-संजय सहगल, टैगोर विद्यार्थी विकास संस्थाए प्रधान

प्रतियोगितावाद को बढ़ावा

सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे और उच्च शिक्षा का सपना देखने वालों को गोद लेने के लिए टैगोर विद्यार्थी विकास संस्था ने परीक्षा का आयोजन किया। शहीदी चौक स्थित मिडिल स्कूल में आयोजित इस परीक्षा में 70 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा में टाप बीस बच्चों को संस्था गोद लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई का खर्च खुद वहन करेगी। परीक्षा में विभिन्न सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चों बैठाया जाता है।



परीक्षा का आयोजन कहां तक सही है, इसका उत्तर देना किसी को भी हैरान कर दे। गोद लेने के लिए परीक्षा? यानी बच्चे को एक तो बोर्ड की परीक्षा का डर, उस पर उच्च शिक्षा हासिल करने के सपने के लिए संस्था की परीक्षा में टाप बीस में आने के लिए मेहनत। मेहनत बुरी नहीं, लेकिन संस्था द्वारा गोद लिया जाए और वह भी परीक्षा के माध्यम से।

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