जम्मू-कश्मीर: सेना 31 मार्च तक सरकार को वापस करेगी जमीन
- जेयू, टैटू ग्राउंड, हाई ग्राउंड और कारगिल की जमीन सरकार को मिलेगी
- सिविल मिलिट्री लाइजन कांफ्रेंस के फैसलों को लागू कराने की कवायद
- श्रीनगर में टैटू ग्राउंड की जमीन के मामले में राज्यपाल और सैन्य कमांडर 31 मार्च से पहले वहां का दौरा करेंगे
- मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली कमेटी सेना के साथ लगातार बैठकें करेगी
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सिविल मिलिट्री लाइजन कांफ्रेंस में लिए गए फैसलों के आधार पर सेना सरकारी जमीन वापस करने को तैयार है। राज्यपाल एनएन वोहरा ने सेना के नार्दर्न कमांड प्रमुख जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा के साथ बैठक में लाइजन कांफ्रेंस में लिए गए फैसलों के अनुपालन की समीक्षा की।
विचार-विमर्श के बाद हुए निर्णय में उत्तरी कमान मुख्यालय जम्मू यूनिवर्सिटी कैंपस के पास स्थित 16.30 एकड़ जमीन, श्रीनगर स्थित टैटू ग्राउंड की 212 एकड़ जमीन, अनंतनाग स्थित हाई ग्राउंड की 456.60 कनाल जमीन के अलावा कारगिल के खुरबा थांग स्थित जमीन को सेना 31 मार्च 2016 से पहले सरकार को सौंप देगी। 31 मार्च से पहले ही मुख्य सचिव के कारगिल दौरे पर खुरबा थांग की जमीन भी हस्तांतरित कर दी जाएगी।
सेना के साथ जमीन के तमाम मामले निपटाने के लिए बनाई गई कमेटी के चेयरमैन मुख्य सचिव हैं। श्रीनगर में टैटू ग्राउंड की जमीन के मामले में राज्यपाल और सैन्य कमांडर 31 मार्च से पहले वहां का दौरा करेंगे और इस जमीन पर पार्क व अन्य निर्माण के प्रस्ताव पर विचार करेंगे।
राज्यपाल ने मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली कमेटी को जम्मू यूनिवर्सिटी, कारगिल और अनंतनाग का दौरा करने के निर्देश दिए, ताकि जमीन वापस लेने की तमाम औपचारिकताएं मौके पर ही पूरी की जाएं।
फायरिंग रेंज मसले पर रक्षा मंत्रालय से होगी बातचीत
राज्यपाल ने सेना के साथ गुलमर्ग बाउल स्थित हाज सहित अन्य मामलों पर हुए फैसलों की भी समीक्षा की। सेना के अधीन आने वाली तमाम इमारतों और अन्य जमीनों के मामले में भी 31 मई 2016 से पहले निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली कमेटी सेना के साथ लगातार बैठकें करेगी।
बैठक में मुख्य सचिव बीआर शर्मा, राज्यपाल के प्रधान सचिव पीके त्रिपाठी, प्रधान सचिव (गृह) आरके गोयल, डिवकाम जम्मू डॉ. पवन कोतवाल और डिवकाम श्रीनगर असगर हसन समून उपस्थित थे।
वहीं रियासत में स्थित विभिन्न फायरिंग रेंज के संबंध में जारी अधिसूचना के मुद्दे पर भी बैठक में विचार किया गया। फायरिंग रेंज के लंबित मामलों के लिए मुख्य सचिव रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत करेंगे। इनमें मुख्य रूप से सेना के अधीन आने वाली भूमि का किराया बढ़ाना भी शामिल है।