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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   An earthquake with a magnitude of 3.4 on the Richter scale hit Leh, Ladakh

Earthquake In Ladakh: भूकंप से कांपी लेह-लद्दाख की धरती, रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई तीव्रता

Tue, 30 Jan 2024 06:58 AM IST
विजय पुंडीर एएनआई, लद्दाख
एएनआई, लद्दाख Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 30 Jan 2024 06:58 AM IST
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An earthquake with a magnitude of 3.4 on the Richter scale hit Leh, Ladakh
Earthquake In Ladakh - फोटो : ANI

लद्दाख में मंगलवार को सुबह साढ़े पांच बजे के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह के समय आए भूकंप ने लोगों की नींद उड़ा दी। लोग डरकर घरों से बाहर निकल गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि लद्दाख के लेह में 3.4 की तीव्रता के झटके महसूस किए गए।

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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने जानकारी देते हुए बताया कि लद्दाख के लेह में मंगलवार सुबह रिक्टर पैमाने पर 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ। भूकंप के झटके सुबह पांच बजकर 39 मिनट पर आया। जिसकी गहराई पांच किलोमीटर दर्ज हुई। 


क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। 


जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

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