{"_id":"5a1092494f1c1b79548be244","slug":"21511035465-jammu-and-kashmir-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दन्ना गांव जाने के लिए सिर्फ पगडंडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दन्ना गांव जाने के लिए सिर्फ पगडंडी
Updated Sun, 19 Nov 2017 01:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसोहली। जानू पंचायत की एक बड़ी आबादी स्वतंत्रता के दशकों के बाद भी सड़क सुविधा से वंचित है। सबसे खराब हालात दन्ना गांव की है। आए दिन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
स्थानीय निवासी मक्खन सिंह, संजय कुमार, नेकराम, बिटटू सिंह आदि ने बताया कि दन्ना से पैदल ही लोगों को शीतलनगर तक आने को मजबूर होना पड़ता है। पगडंडीनुमा रास्ता होने के चलते गांव में आज तक वाहन नहीं पहुंच पाया है। हालत यह है कि मार्ग पर हल्की बारिश भी फिसलन का सबब बनती है। दिन हो रात यदि कोई गांव में बीमार हो जाए तो पालकी में डालकर लाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
ग्र्रामीणों ने बताया कि गडोडी नाला बारिश में उफान पर रहता है, जिससे लोगों की जान का खतरा रहता है। सबसे अधिक दिक्कत स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है, जिनके सुरक्षित घर न पहुंचने तक परिवार के सदस्य चिंतित रहते हैं। रूप सिंह ने बताया कि शीतलनगर की गांव से दूरी 12 किलोमीटर है और यहां पैदल पहुंचने तक मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। गांव में किसी ने भवन निर्माण भी करवाना हो तो सामग्री पहुंचाने के लिए खर्चा और भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्थानीय निवासी मक्खन सिंह, संजय कुमार, नेकराम, बिटटू सिंह आदि ने बताया कि दन्ना से पैदल ही लोगों को शीतलनगर तक आने को मजबूर होना पड़ता है। पगडंडीनुमा रास्ता होने के चलते गांव में आज तक वाहन नहीं पहुंच पाया है। हालत यह है कि मार्ग पर हल्की बारिश भी फिसलन का सबब बनती है। दिन हो रात यदि कोई गांव में बीमार हो जाए तो पालकी में डालकर लाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
विज्ञापन
ग्र्रामीणों ने बताया कि गडोडी नाला बारिश में उफान पर रहता है, जिससे लोगों की जान का खतरा रहता है। सबसे अधिक दिक्कत स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है, जिनके सुरक्षित घर न पहुंचने तक परिवार के सदस्य चिंतित रहते हैं। रूप सिंह ने बताया कि शीतलनगर की गांव से दूरी 12 किलोमीटर है और यहां पैदल पहुंचने तक मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। गांव में किसी ने भवन निर्माण भी करवाना हो तो सामग्री पहुंचाने के लिए खर्चा और भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन