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लौट आए प्रवासी पक्षी
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:46 AM IST
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मीलों उड़ान भरकर पहुंचने लगे विदेशी मेहमान
हर साल जसरोटा और बसोहली की रावी घाटी में प्रवासी पक्षियों का लगता है जमघट
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ।
मीलों की ऊंची उड़ान और अपने रैन बसेरों को छोड़कर जम्मू कश्मीर की धरती पर हर साल लाखों की तादाद में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यूं तो जम्मू का घराना वेटलैंड इन प्रवासी पक्षियों की चहचहाट के लिए मशहूर है, लेकिन कठुआ जिले के जसरोटा और बसोहली की रावी घाटी में भी प्रवासी पक्षियों का हर साल जमघट लगता है। इस साल भी प्रवासी पक्षियों ने कठुआ शहर के आसपास, जसरोटा वन्यजीव अभ्यारण्य समेत थें डैम से सटे इलाकों में डेरा डालना शुरू कर दिया है। तीन महीने के यह मेहमान सर्दियों में इन इलाकों की रौनक और खूबसूरती को भी बढ़ाते हैं लेकिन आज तक जिला कठुआ में इन प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों को लेकर कोई सर्वेक्षण नहीं हो पाया था। इन प्रक्षियों की प्रजातियों और तादाद को लेकर सर्वेक्षण करवाए जाने की योजना फिलहाल लंबित है।
गत वर्ष सरूईंसर-मानसर में भी पक्षियों की संख्या और प्रजातियों को लेकर सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण में यह भी खुलासा होगा इन पक्षियों को जिला कठुआ की कौन सी जगह ज्यादा रास आती है। इनमें से पक्षियों की कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं जो ऋतु बदलने तक यहां भी डेरा डालेंगी। जसरोटा वन्यजीव अभ्यारण्य दस वर्ग किलोमीटर में फैला है तो थैं कंजरवेशन रिजर्व 19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कठुआ में पहुंचने वाली पक्षियों की कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं जो हजारों मील का सफल तय कर पहुंचती हैं। साइबेरियन हंस, कील, ग्रे हेरून, लिटिल ग्रीब ऐसी प्रजाति के पक्षी हैं जो न्यूजीलैंड, अमेरिका और आस्ट्रेलिया से पहुंचते हैं। उत्तरी यूरोप और मध्य एशिया से भी पक्षियों की दर्जनों प्रजातियों को राज्य में दर्ज किया गया है।
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पिछले वर्ष सूखे के चलते जल्द लौट गए थे पक्षी
हर साल जिला की खूबसूरत और हरी भरी वादियों में पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों को जिले का मौसम रास नहीं आया था। इस बार मौसम विभाग ने चौदह नवंबर को आंशिक रूप से जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे यहां सर्दी जोर पकड़ लेगी। तब इन पंछियों को अपने मूल इलाके के अनुरूप मौसम मिलेगा। ऐसे में उम्मीद है कि इस बार विदेशी मेहमान बनकर आ रहे यह परिंदे अधिक समय तक जिला में अपनी चहल पहल दर्ज करवाएंगे।
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