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होमगार्ड कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, कहा घर बेच देंगे हक लेके रहेंगे
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:18 AM IST
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कठुआ। राज्य में बतौर होमगार्ड सेवा करते रहे कर्मचारियों ने रविवार को राज्य सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। होमगार्ड कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कुछ दिनों के भीतर ही अन्य कर्मचारियों की भांति उन्हें भी नहीं नियमित नहीं किया गया तो वह सड़कों पर उतर आएंगे और आवश्यकता पड़ी तो सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक भी जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें अगर इस कार्य के लिए अपने घर भी बेचने पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन सरकार की भेदभावपूर्ण नीति को अब सहन नहीं करेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में बैठक की और उसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। होमगार्ड कर्मचारियों ने कहा कि पिछले 25 साल से वह 500 रुपये महीने के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल में उन्हें मात्र 6000 रुपये मिलते हैं, जबकि वह पूरा दिन ड्यूटी करते हैं। सरकार इस बात का हिसाब दे कि आखिर 500 रुपये में किस प्रकार कोई व्यक्ति अपने घर का खर्च चला सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री, विधायक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी हजारों रुपये प्रति महीना पगार पाते हैं, लेकिन उन्हें 500 रुपये महीना दिया जाता है, जो एक वक्त की रोटी भी पूरी नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें नियमित करने के लिए बार-बार आश्वासन देती है, लेकिन जब नियमित करने की बात आती है तो सरकार अपने हाथ खींच लेती है। सरकार ने यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांग पर कोई पहल नहीं की तो वह सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आएंगे। उसके बाद भी यदि सरकार ने उनके खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियों को बंद नहीं किया, तो वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट जाकर अपने हक के लिए दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें नियमित नहीं कर सकती तो इस विभाग को बंद कर दे, लेकिन उन्हें एक स्पष्ट जवाब दे। बार-बार आश्वासन देकर हमें गुमराह न करे।
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प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में बैठक की और उसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। होमगार्ड कर्मचारियों ने कहा कि पिछले 25 साल से वह 500 रुपये महीने के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल में उन्हें मात्र 6000 रुपये मिलते हैं, जबकि वह पूरा दिन ड्यूटी करते हैं। सरकार इस बात का हिसाब दे कि आखिर 500 रुपये में किस प्रकार कोई व्यक्ति अपने घर का खर्च चला सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री, विधायक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी हजारों रुपये प्रति महीना पगार पाते हैं, लेकिन उन्हें 500 रुपये महीना दिया जाता है, जो एक वक्त की रोटी भी पूरी नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें नियमित करने के लिए बार-बार आश्वासन देती है, लेकिन जब नियमित करने की बात आती है तो सरकार अपने हाथ खींच लेती है। सरकार ने यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांग पर कोई पहल नहीं की तो वह सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आएंगे। उसके बाद भी यदि सरकार ने उनके खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियों को बंद नहीं किया, तो वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट जाकर अपने हक के लिए दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें नियमित नहीं कर सकती तो इस विभाग को बंद कर दे, लेकिन उन्हें एक स्पष्ट जवाब दे। बार-बार आश्वासन देकर हमें गुमराह न करे।
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