{"_id":"5a259d094f1c1b9f678bf5bc","slug":"131512414473-jammu-and-kashmir-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूनिवर्सिटी की बढ़ी फीस दे पाना विद्यार्थियों के लिए मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूनिवर्सिटी की बढ़ी फीस दे पाना विद्यार्थियों के लिए मुश्किल
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किश्तवाड़।
विश्वविद्यालय कैंपस में पढ़ रहे एमएसआईटी, एमएससी जूलोजी, एमए कश्मीरी वालों की फीस बढ़ा दी गई है, जिससे छात्र-छात्राओं में भारी रोष है। छात्र अनूप कुमार का कहना है कि एमएससी के विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले ही बढ़ाई गई फीस जमा करने को कह दिया गया है।
एमएससी जूलोजी (एच एंड एसडी) के छात्र कुलदीप कुमार का कहना कि जब हमने प्रवेश लिया था, उस समय प्रति सेमेस्टर 13,500 रुपये फीस दी थी। इस तरह चारों सेमेस्टर की फीस 54 हजार रुपये होती थी, लेकिन कुछ ही समय बाद विश्वविद्यालय ने 10 फीसदी फीस बढ़ाकर प्रति सेमेस्टर 15 हजार रुपये कर दिया। इसे भी विद्यार्थियों ने जमा कर दिया। अब जबकि 10 दिन बाद ही विद्यार्थियों को तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा देनी है, ऐसे में अचानक 28 नवंबर को एक आदेश जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे कोर्स की फीस डेढ़ लाख रुपये कर दी है। अभी हमसे बकाया राशि में से 45,700 रुपये मांगें जा रहे हैं, जो तीसरे सेमेस्टर के लिए है। बताया यह भी जा रहा है कि जो विद्यार्थी पहले व दूसरे सेमेस्टर को पास कर चुके हैं, उसके लिए भी बकाया फीस वसूली जाएगी। इस तरह कुल फीस डेढ़ लाख हो जाएगी। यह विद्यार्थियों के साथ लूट है। हमारे पास पहली नोटिस और रसीदें उपलब्ध हैं, जिसमें कुल 54 हजार रुपये में पूरा कोर्स करवाना था। हालांकि इसके बाद भी कुछ ही दिनों में 10 फीसदी फीस बाई गई थी और हमने वह जमा कर दिया। अब अचानक इतना पैसा हम गरीब लोग कहां से लाएंगे।
एमएससी वालों को पढ़ा रहे पीजी किए हुए कांट्रैक्चुअल शिक्षक
विद्यार्थियों ने बताया कि हमें धमकाया जा रहा है कि जो विद्यार्थी फीस नहीं जमा करवाएंगे उनको परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया जाएगा। यह कहा जा रहा है कि कैंपस में जितना खर्च हो रहा है, सब विद्यार्थियों को ही उठाना होगा। हमें पीजी कोर्स में कोई पीएचडी या नेट या जेआरएफ वाला शिक्षक नहीं पढ़ा रहा है, पीजी किए हुए कांट्रैक्चुअल शिक्षकही पढ़ा रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सरासर नाइंसाफी कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विश्वविद्यालय कैंपस में पढ़ रहे एमएसआईटी, एमएससी जूलोजी, एमए कश्मीरी वालों की फीस बढ़ा दी गई है, जिससे छात्र-छात्राओं में भारी रोष है। छात्र अनूप कुमार का कहना है कि एमएससी के विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले ही बढ़ाई गई फीस जमा करने को कह दिया गया है।
एमएससी जूलोजी (एच एंड एसडी) के छात्र कुलदीप कुमार का कहना कि जब हमने प्रवेश लिया था, उस समय प्रति सेमेस्टर 13,500 रुपये फीस दी थी। इस तरह चारों सेमेस्टर की फीस 54 हजार रुपये होती थी, लेकिन कुछ ही समय बाद विश्वविद्यालय ने 10 फीसदी फीस बढ़ाकर प्रति सेमेस्टर 15 हजार रुपये कर दिया। इसे भी विद्यार्थियों ने जमा कर दिया। अब जबकि 10 दिन बाद ही विद्यार्थियों को तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा देनी है, ऐसे में अचानक 28 नवंबर को एक आदेश जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे कोर्स की फीस डेढ़ लाख रुपये कर दी है। अभी हमसे बकाया राशि में से 45,700 रुपये मांगें जा रहे हैं, जो तीसरे सेमेस्टर के लिए है। बताया यह भी जा रहा है कि जो विद्यार्थी पहले व दूसरे सेमेस्टर को पास कर चुके हैं, उसके लिए भी बकाया फीस वसूली जाएगी। इस तरह कुल फीस डेढ़ लाख हो जाएगी। यह विद्यार्थियों के साथ लूट है। हमारे पास पहली नोटिस और रसीदें उपलब्ध हैं, जिसमें कुल 54 हजार रुपये में पूरा कोर्स करवाना था। हालांकि इसके बाद भी कुछ ही दिनों में 10 फीसदी फीस बाई गई थी और हमने वह जमा कर दिया। अब अचानक इतना पैसा हम गरीब लोग कहां से लाएंगे।
विज्ञापन
एमएससी वालों को पढ़ा रहे पीजी किए हुए कांट्रैक्चुअल शिक्षक
विद्यार्थियों ने बताया कि हमें धमकाया जा रहा है कि जो विद्यार्थी फीस नहीं जमा करवाएंगे उनको परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया जाएगा। यह कहा जा रहा है कि कैंपस में जितना खर्च हो रहा है, सब विद्यार्थियों को ही उठाना होगा। हमें पीजी कोर्स में कोई पीएचडी या नेट या जेआरएफ वाला शिक्षक नहीं पढ़ा रहा है, पीजी किए हुए कांट्रैक्चुअल शिक्षकही पढ़ा रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सरासर नाइंसाफी कर रहा है।
विज्ञापन