{"_id":"5a089b394f1c1ba7678bb05b","slug":"131510513465-jammu-and-kashmir-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिलावर के कई तालाबों का अस्तित्व खतरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिलावर के कई तालाबों का अस्तित्व खतरे में
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलावर।
उपजिला जहां कई ऐतिहासिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं यहां के कई तालाब ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। मुनासिब संरक्षण के अभाव में इन तालाबों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। यदि जल्द इनके संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई, तो इनका नामोनिशान इस धरती से मिट जाएगा। बिलावर, रामकोट, भड्डू, कोहग, ठेंठू, देबल व अन्य कई नगरों में कई ऐतिहासिक तालाब हैं, जो आज सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के शिकार हैं। रामकोट केऐतिहासिक तालाबों का महत्व भी किसी से कम नहीं है। किसी वक्त लोगों की प्यास बुझाने और उनकी जल संबंधी जरूरतों को पूरा करने वाले ये तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। भड्डू नगर में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक तालाब की हालत भी कुछ ठीक नहीं है। कोहग नगर में हायर सेकेंडरी स्कूल के बाहर स्थित तालाब और कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है। सेरी मूनी के रूगा गांव का तालाब में दलदल बन गया है। ठेंठू के तालाब की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। हर साल सैकडों लोग इन ऐतिहासिक तालाबों में स्नान करने के लिए आते हैं।
इसी प्रकार नगरोटा गुजरू के तालाब को आज पार्क में तब्दील कर दिया गया है। भविष्य में पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। लेकिन उपजिला के तालाबों की संख्या प्रशासन, पंचायत व स्थानीय लोगों की अनदेखी की वजह से लगातार सिमटती जा रही है। कुछ संस्थाएं और लोग कुछ तालाबों के संरक्षण के लिए आगे आए हैं, फिंतर गांव के लोग हर साल अपने गांव के तालाब को स्वयं कारसेवा कर साफ करते हैं। इससे गर्मियों में उन्हें पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता। अन्य लोगों को भी प्रशासन की तरफ न देख कर स्वयं अपने-अपने गांवों के तालाबों के संरक्षण की तरफ ध्यान देना चाहिए। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक तालाबों का संरक्षण नहीं किया गया तो इनका अस्तित्व सदा के लिए मिट जाएगा।
विज्ञापन
उपजिला जहां कई ऐतिहासिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं यहां के कई तालाब ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। मुनासिब संरक्षण के अभाव में इन तालाबों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। यदि जल्द इनके संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई, तो इनका नामोनिशान इस धरती से मिट जाएगा। बिलावर, रामकोट, भड्डू, कोहग, ठेंठू, देबल व अन्य कई नगरों में कई ऐतिहासिक तालाब हैं, जो आज सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के शिकार हैं। रामकोट केऐतिहासिक तालाबों का महत्व भी किसी से कम नहीं है। किसी वक्त लोगों की प्यास बुझाने और उनकी जल संबंधी जरूरतों को पूरा करने वाले ये तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। भड्डू नगर में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक तालाब की हालत भी कुछ ठीक नहीं है। कोहग नगर में हायर सेकेंडरी स्कूल के बाहर स्थित तालाब और कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है। सेरी मूनी के रूगा गांव का तालाब में दलदल बन गया है। ठेंठू के तालाब की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। हर साल सैकडों लोग इन ऐतिहासिक तालाबों में स्नान करने के लिए आते हैं।
इसी प्रकार नगरोटा गुजरू के तालाब को आज पार्क में तब्दील कर दिया गया है। भविष्य में पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। लेकिन उपजिला के तालाबों की संख्या प्रशासन, पंचायत व स्थानीय लोगों की अनदेखी की वजह से लगातार सिमटती जा रही है। कुछ संस्थाएं और लोग कुछ तालाबों के संरक्षण के लिए आगे आए हैं, फिंतर गांव के लोग हर साल अपने गांव के तालाब को स्वयं कारसेवा कर साफ करते हैं। इससे गर्मियों में उन्हें पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता। अन्य लोगों को भी प्रशासन की तरफ न देख कर स्वयं अपने-अपने गांवों के तालाबों के संरक्षण की तरफ ध्यान देना चाहिए। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक तालाबों का संरक्षण नहीं किया गया तो इनका अस्तित्व सदा के लिए मिट जाएगा।
विज्ञापन