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FB पर कमेंट ने इन युवाओं को जड़ों से जोड़ दिया, जानिए कैसे...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 07 Jun 2017 02:28 PM IST
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कर्मकाण्ड पाठशाला में प्रशिक्षणार्थी
- फोटो : amar ujala
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आज के दौर में फेसबुक से केवल चेटिंग ही नहीं बल्कि अपनी कमियों को भी दूर किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला जैसलमेर में सामने आया है जहां फेसबुक पर किए गए कमेंट के बाद कई युवा जड़ों से जुड़ गए।
मामला जैसलमेर की व्यास बगीची से जुड़ा है। यहां के रहने वाले पंडित चंद्रमोहन केवलिया ने फेसबुक पर युवाओं को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों एक कमेंट लिखा कि वे आज के दौर में पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। इसके चलते उन्हें धार्मिक कर्मकांड और नित्य कर्म की भी जानकारी नहीं है। उनके इस कमेंट की प्रतिक्रिया हुई। इसे पढ़कर कुछ युवाओं ने लिखा कि वे तो खुद सीखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कोई सिखाने वाला नहीं है। इस पर केवलिया ने उन्हें अपने यहां आकर निशुल्क कर्मकाण्ड की शिक्षा लेने का न्योता दिया। ये पढ़कर आज करीब 30 युवक उनसे धार्मिक कर्मकांड की शिक्षा ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यहां लगने वाली कर्मकांड पाठशाला में तीन प्रकार के कर्मों की जानकारी दी जा रही है। इसमें पहल कर्म नित्यकर्म की श्रेणी में आता है जिसमें अपने मन की शांति के लिए किया जाने वाला नित्यकर्म व्यक्ति अपने घर—परिवार के लिए करता है। दूसरा कर्म नैमेत्तिक कर्म, जो अवसर—आयोजन आदि पर किए जाते हैं। इसी क्रम में तीसरा कर्म काम्य कर्म होता है जो किसी मनोकामना के लिए यज्ञ—हवन आदि करने से संबंधित होता है।
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केवलिया ने बताया कि उनके इस कार्य में उनके साथ—साथ आनंद महाराज, आदित्यमोहन केवलिया, मृत्युंजय व्यास और संजय श्रीमाली पाठशाला में आने वाले युवाओं को अलग—अलग नित्य कर्म से संबंधित ट्रैनिंग देते हैं। केवलिया ने इसके लिए विशेष रूप से छह माह का कोर्स तैयार किया है, जिसकी शुरुआत संध्या से की जा रही है। इसके बाद श्रीसूक्त, श्रीसूक्तम, श्रीयंत्र यज्ञ, लक्ष्मी हवन आदि सिखाए जाएंगे। आखिर में रूद्राष्टध्यायी, दुर्गा व गीता पाठ भी सिखाया जाएगा। गौरतलब है कि पंडित चंद्रमोहन शहर के 100 से अधिक युवाओं को रूद्रीपाठ की ट्रैनिंग दे चुके हैं।
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मामला जैसलमेर की व्यास बगीची से जुड़ा है। यहां के रहने वाले पंडित चंद्रमोहन केवलिया ने फेसबुक पर युवाओं को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों एक कमेंट लिखा कि वे आज के दौर में पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं। इसके चलते उन्हें धार्मिक कर्मकांड और नित्य कर्म की भी जानकारी नहीं है। उनके इस कमेंट की प्रतिक्रिया हुई। इसे पढ़कर कुछ युवाओं ने लिखा कि वे तो खुद सीखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कोई सिखाने वाला नहीं है। इस पर केवलिया ने उन्हें अपने यहां आकर निशुल्क कर्मकाण्ड की शिक्षा लेने का न्योता दिया। ये पढ़कर आज करीब 30 युवक उनसे धार्मिक कर्मकांड की शिक्षा ले रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि यहां लगने वाली कर्मकांड पाठशाला में तीन प्रकार के कर्मों की जानकारी दी जा रही है। इसमें पहल कर्म नित्यकर्म की श्रेणी में आता है जिसमें अपने मन की शांति के लिए किया जाने वाला नित्यकर्म व्यक्ति अपने घर—परिवार के लिए करता है। दूसरा कर्म नैमेत्तिक कर्म, जो अवसर—आयोजन आदि पर किए जाते हैं। इसी क्रम में तीसरा कर्म काम्य कर्म होता है जो किसी मनोकामना के लिए यज्ञ—हवन आदि करने से संबंधित होता है।
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केवलिया ने बताया कि उनके इस कार्य में उनके साथ—साथ आनंद महाराज, आदित्यमोहन केवलिया, मृत्युंजय व्यास और संजय श्रीमाली पाठशाला में आने वाले युवाओं को अलग—अलग नित्य कर्म से संबंधित ट्रैनिंग देते हैं। केवलिया ने इसके लिए विशेष रूप से छह माह का कोर्स तैयार किया है, जिसकी शुरुआत संध्या से की जा रही है। इसके बाद श्रीसूक्त, श्रीसूक्तम, श्रीयंत्र यज्ञ, लक्ष्मी हवन आदि सिखाए जाएंगे। आखिर में रूद्राष्टध्यायी, दुर्गा व गीता पाठ भी सिखाया जाएगा। गौरतलब है कि पंडित चंद्रमोहन शहर के 100 से अधिक युवाओं को रूद्रीपाठ की ट्रैनिंग दे चुके हैं।