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Mother's Day: यहां महिलाएं मां की तरह पिलाती है चिंकारा को अपना दूध
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 14 May 2017 01:51 PM IST
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हिरण को देते हैं बच्चों जैसा प्यार
- फोटो : अमर उजाला
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मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे का आयोजन होता है। लेकिन, राजस्थान में ये माताएं अपने आप में अनूठी है। राजस्थान के शेखावटी—मारवाड़ इलाके में बिश्नोई समाज की महिलाओं में चिंकारा जैसे वन्यजीवों के लिए ममता के कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। स्थिति ये है कि संकट में आने पर चिंकारा को ये माताएं अपना दूध पिलाने से पीछे नहीं हटती।
चिंकारा को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में भी संरक्षित घोषित किया गया है। लेकिन, इस प्राणी के संरक्षण के लिए बिश्नोई समाज करीब साढ़े पांच सौ साल से काम कर रहा है। दरअसल करीब साढ़े पांच सौ साल पहले गुरु जंभेश्वरजी ने जीवन के 29 नियम बताए थे, और उनमें एक नियम चिंकारा सहित अन्य प्राणियों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह प्रेम करना भी शामिल है।
ये समुदाय आज भी इसी परम्परा पर कायम है। गांव या ओरण में कोई घायल चिंकारा—हिरण मिल जाए तो इस समुदाय के लोग उसे अपने घर लाकर उसकी देखभाल परिवार के सदस्य की तरह करते है। राजस्थान में ऐसे कई उदाहरण सामने आए है जब महिलाओं ने नवजात चिंकारा को अपना दूध तक पिलाकर जीवनदान दिया।
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अनोखी बात यह है कि महिलाओं से मां का स्नेह पाकर ये जानवर भी उनसे हिल मिल जाते हैं और दूध पीने के दौरान किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाते हैं।
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चिंकारा को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में भी संरक्षित घोषित किया गया है। लेकिन, इस प्राणी के संरक्षण के लिए बिश्नोई समाज करीब साढ़े पांच सौ साल से काम कर रहा है। दरअसल करीब साढ़े पांच सौ साल पहले गुरु जंभेश्वरजी ने जीवन के 29 नियम बताए थे, और उनमें एक नियम चिंकारा सहित अन्य प्राणियों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह प्रेम करना भी शामिल है।
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ये समुदाय आज भी इसी परम्परा पर कायम है। गांव या ओरण में कोई घायल चिंकारा—हिरण मिल जाए तो इस समुदाय के लोग उसे अपने घर लाकर उसकी देखभाल परिवार के सदस्य की तरह करते है। राजस्थान में ऐसे कई उदाहरण सामने आए है जब महिलाओं ने नवजात चिंकारा को अपना दूध तक पिलाकर जीवनदान दिया।
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अनोखी बात यह है कि महिलाओं से मां का स्नेह पाकर ये जानवर भी उनसे हिल मिल जाते हैं और दूध पीने के दौरान किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाते हैं।