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जानिए, क्यों हुआ आॅटो रिक्शा में बच्चे का जन्म
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 27 Apr 2017 03:02 PM IST
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आॅटो रिक्शा
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अजमेर के ब्यावर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। यहां एक प्रसुता ने अस्पताल जाते समय रास्ते में ही तेज प्रसव पीड़ा के बाद बच्चे का जन्म दिया।
जानकारी के अनुसार ब्यावर के पास ही स्थित गांव रूपनगर निवासी महिला नाजिया पत्नी निजाम को मंगलवार सुबह घर पर प्रसव पीड़ा हुई। इस पर महिला के परिजन उसे यहां चलने वाले आॅटो मे बिठाकर राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अग्निशमन कार्यालय के पास महिला को तेज प्रसव पीड़ा हुई। इस पर परिजन उसे हिम्मत रखने की कहते हुए ढांढस बंधा रहे थे। तभी प्रसव पीड़ा तेज होने पर उसने आॅटो को आगे ले जाने से मना कर दिया।
इस पर महिला को ने आॅटो में बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद परिजनों ने तुरंत अस्पताल में सूचना भिजवाई। सूचना पर सतर्क हुए अस्पताल प्रशासन ने एक एंबुलेंस मौके पर भेजी, जिसके जरिये प्रसुता और नवजात को राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय लाया गया। यहां पहुंचते ही अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ ने महिला और नवजात की स्वास्थ्य जांच की। चिकित्सकों के अनुसार दोनों स्वस्थ है, हालांकि उनकी पर्याप्त देखरेख की जा रही है।
गौरतलब है कि एक ओर तो सरकार मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है वहीं दूसरी ओर संसाधनों और जागरूकता के अभाव में इस तरह की घटनाएं अस्पताल में प्रसव के मार्ग में बाधा बन रही है।
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जानकारी के अनुसार ब्यावर के पास ही स्थित गांव रूपनगर निवासी महिला नाजिया पत्नी निजाम को मंगलवार सुबह घर पर प्रसव पीड़ा हुई। इस पर महिला के परिजन उसे यहां चलने वाले आॅटो मे बिठाकर राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अग्निशमन कार्यालय के पास महिला को तेज प्रसव पीड़ा हुई। इस पर परिजन उसे हिम्मत रखने की कहते हुए ढांढस बंधा रहे थे। तभी प्रसव पीड़ा तेज होने पर उसने आॅटो को आगे ले जाने से मना कर दिया।
इस पर महिला को ने आॅटो में बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद परिजनों ने तुरंत अस्पताल में सूचना भिजवाई। सूचना पर सतर्क हुए अस्पताल प्रशासन ने एक एंबुलेंस मौके पर भेजी, जिसके जरिये प्रसुता और नवजात को राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय लाया गया। यहां पहुंचते ही अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ ने महिला और नवजात की स्वास्थ्य जांच की। चिकित्सकों के अनुसार दोनों स्वस्थ है, हालांकि उनकी पर्याप्त देखरेख की जा रही है।
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गौरतलब है कि एक ओर तो सरकार मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है वहीं दूसरी ओर संसाधनों और जागरूकता के अभाव में इस तरह की घटनाएं अस्पताल में प्रसव के मार्ग में बाधा बन रही है।
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