{"_id":"594a84e24f1c1b29548b45bc","slug":"without-name-bonafide","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनोखा मूल निवास प्रमाण पत्र, न नाम है और न पता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनोखा मूल निवास प्रमाण पत्र, न नाम है और न पता
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 21 Jun 2017 08:29 PM IST
विज्ञापन
बिना नाम लिखे मूल निवास प्रमाण पत्र
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान में तहसीलदार और पटवारियों की हड़ताल का असर कामकाज पर नजर आने लगा है। ई—मित्र से गंभीर खामियों वाले मूल निवास एवं जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे है। ऐसा नमूना बुधवार को अजमेर में सामने आया। यहां बिना नाम और पते के मूल निवास प्रमाण—पत्र जारी कर दिया।
राजस्थान में विभिन्न मांगों को लेकर पटवारी और तहसीलदार करीब एक सप्ताह से हड़ताल पर है। लोगों की परेशानी को देखते हुए अजमेर जिला कलक्टर ने मंगलवार को ई—मित्र संचालकों को जाति एवं मूल निवास प्रमाण—पत्र जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद ई—मित्र संचालकों ने ये प्रमाण—पत्र जारी करना शुरू कर दिया। इस पर तहसीलदार के हस्ताक्षर की डिजिटल रुप में होते है, इसलिए इन्हें जारी करने की कार्रवाई शुरु कर दी।
ऐसे में बुधवार को जारी हुए प्रमाण—पत्रों में कई गंभीर खामियां नजर आई। इससे छात्रों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई। दरअसल इन प्रमाण—पत्रों में किसी का नाम अधूरा है तो किसी का पता गायब है। किसी में फोटो नहीं और कहीं फोटो है तो नाम नही। इन प्रमाण—पत्रों को लेने से स्कूलों ने भी इनकार कर दिया। ई—मित्र संचालक भी गलतियां सुधारने को लेकर हाथ खड़े कर रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजस्थान में विभिन्न मांगों को लेकर पटवारी और तहसीलदार करीब एक सप्ताह से हड़ताल पर है। लोगों की परेशानी को देखते हुए अजमेर जिला कलक्टर ने मंगलवार को ई—मित्र संचालकों को जाति एवं मूल निवास प्रमाण—पत्र जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद ई—मित्र संचालकों ने ये प्रमाण—पत्र जारी करना शुरू कर दिया। इस पर तहसीलदार के हस्ताक्षर की डिजिटल रुप में होते है, इसलिए इन्हें जारी करने की कार्रवाई शुरु कर दी।
विज्ञापन
ऐसे में बुधवार को जारी हुए प्रमाण—पत्रों में कई गंभीर खामियां नजर आई। इससे छात्रों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई। दरअसल इन प्रमाण—पत्रों में किसी का नाम अधूरा है तो किसी का पता गायब है। किसी में फोटो नहीं और कहीं फोटो है तो नाम नही। इन प्रमाण—पत्रों को लेने से स्कूलों ने भी इनकार कर दिया। ई—मित्र संचालक भी गलतियां सुधारने को लेकर हाथ खड़े कर रहे है।
विज्ञापन