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मौसम न बिगाड़ दे कहीं वन्यजीवों की गिनती के आंकड़े
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 10 May 2017 05:54 PM IST
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प्रदेश के कई इलाकों में बुधवार दोपहर बाद मौसम ने पलटा खाया है। कहीं बूंदाबांदी हुई तो कई तेज बौछारों ने तर किया। मौसम के इस बदलाव से प्रदेश में चल वन्यजीव गणना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
राजस्थान में वन्यजीव गणना हर साल बुद्ध पूर्णिमा को होती है। इस बार ये गणना बुधवार सुबह से शुरु हुई। लगातार 24 घंटे चलने वाली यह गणना गुरुवार को सुबह पूरी होगी। प्रदेशभर में करीब दो हजार स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं जहां यह गणना हो रही है। वनकर्मी और वॉलियंटियर वाटर हॉल्स के आसपास मचान पर बैठकर गणना कर रहे है।
दूसरी तरफ जयपुर समेत कई इलाकों दोपहर बाद हुई बूंदाबांदी और बारिश का असर गणना पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जलस्रोतों पर पानी पीने आने वाले पैंथर के पगमार्क मिट जाएंगे या उनके पगमार्क ठीक ढंग से उभर नहीं पाएंगे। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस आशंका से इनकार करते हुए कहा जा रहा है कि अभी बारिश ज्यादा तेज नहीं है। इसके अतिरिक्त चिन्हित जलस्रोतों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर पानी जमा होने से भी गणना पर असर पड़ सकता है।
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जयपुर में गणना झालाना पार्क, गलता क्षेत्र, खोल के हनुमानजी, नाहरगढ और जमवारामगढ़ वन्यजीव अभयारण्यों में हो रही है। इन इलाकों में करीब 70 जगह गणना के लिए चिन्हित की है जहां जंगली जीवों का मूवमेंट रहता हैं।
वन्यजीव गणना में बघेरे, जरख, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, सियागोह, मोर आदि शामिल किए जाते है। बाघों की गणना इस दौरान नहीं होती। बाघ की गणना अलग से होती है। हालांकि कुछ साल पहले तक बाघ की गणना भी इसी तरीके से होती थी, लेकिन सरिस्का में बाघों की गिनती के फर्जी आंकड़ों पर हुए विवाद के बाद तकनीक बदल दी गई। अब ये गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान की देखरेख में होती है।
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राजस्थान में वन्यजीव गणना हर साल बुद्ध पूर्णिमा को होती है। इस बार ये गणना बुधवार सुबह से शुरु हुई। लगातार 24 घंटे चलने वाली यह गणना गुरुवार को सुबह पूरी होगी। प्रदेशभर में करीब दो हजार स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं जहां यह गणना हो रही है। वनकर्मी और वॉलियंटियर वाटर हॉल्स के आसपास मचान पर बैठकर गणना कर रहे है।
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दूसरी तरफ जयपुर समेत कई इलाकों दोपहर बाद हुई बूंदाबांदी और बारिश का असर गणना पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जलस्रोतों पर पानी पीने आने वाले पैंथर के पगमार्क मिट जाएंगे या उनके पगमार्क ठीक ढंग से उभर नहीं पाएंगे। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस आशंका से इनकार करते हुए कहा जा रहा है कि अभी बारिश ज्यादा तेज नहीं है। इसके अतिरिक्त चिन्हित जलस्रोतों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर पानी जमा होने से भी गणना पर असर पड़ सकता है।
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जयपुर में गणना झालाना पार्क, गलता क्षेत्र, खोल के हनुमानजी, नाहरगढ और जमवारामगढ़ वन्यजीव अभयारण्यों में हो रही है। इन इलाकों में करीब 70 जगह गणना के लिए चिन्हित की है जहां जंगली जीवों का मूवमेंट रहता हैं।
इन वन्यजीवों पर रहेगी नजर
वन्यजीव गणना में बघेरे, जरख, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, सियागोह, मोर आदि शामिल किए जाते है। बाघों की गणना इस दौरान नहीं होती। बाघ की गणना अलग से होती है। हालांकि कुछ साल पहले तक बाघ की गणना भी इसी तरीके से होती थी, लेकिन सरिस्का में बाघों की गिनती के फर्जी आंकड़ों पर हुए विवाद के बाद तकनीक बदल दी गई। अब ये गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान की देखरेख में होती है।