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2000 प्वाइंट्स तय, जहां इस दिन 24 घंटे रहेगी वाइल्ड लाइफ पर निगाहें
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 08 May 2017 05:12 PM IST
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- फोटो : Internet
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राजस्थान के फॉरेस्ट एरिया में करीब दो हजार स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं जहां 10 और 11 मई को वाइल्ड लाइफ की काउंटिंग होगी। इस दौरान मचान या वॉच टावर पर बैठे वनकर्मी और वॉलियंटियर इन प्वाइंट्स पर पानी पीने आने वाली वाइल्ड लाइफ की काउंटिंग करेंगें।
इस वॉटर हॉल सेंसेस के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। वाइल्ड लाइफ काउंटिंग आमतौर पर हर साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन आयोजित होती है। इस दिन चंद्रमा की रोशनी पूरी होती है तथा जंगल में पानी के प्राकृतिक जलस्रोतों की संख्या कम हो जाती है जिससे उनकी गिनती करना आसान हो जाता है।
दरअसल 24 घंटे में वन्यजीव कम से कम एक बार पानी जरुर पीता है। ऐसे में जंगल में जितने भी पानी के स्रोत होते है वहां वनकर्मी निगरानी के लिए बैठते है। प्रदेश में करीब दो हजार और राजधानी जयपुर में वन विभाग ने करीब 70 जगह गणना के लिए चिन्हित की है जहां जंगली जीवों का मूवमेंट रहता हैं।
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इन वन्यजीवों पर रहेगी नजर
वन्यजीव गणना में बघेरे, जरख, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, सियागोह, मोर आदि शामिल किए जाते है। बाघों की गणना इस दौरान नहीं होती। बाघ की गणना अलग से होती है। हालांकि कुछ साल पहले तक बाघ की गणना भी इसी तरीके से होती थी, लेकिन सरिस्का में बाघों की गिनती के फर्जी आंकड़ों पर हुए विवाद के बाद तकनीक बदल दी गई। अब ये गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान की देखरेख में होती है।
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इस वॉटर हॉल सेंसेस के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। वाइल्ड लाइफ काउंटिंग आमतौर पर हर साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन आयोजित होती है। इस दिन चंद्रमा की रोशनी पूरी होती है तथा जंगल में पानी के प्राकृतिक जलस्रोतों की संख्या कम हो जाती है जिससे उनकी गिनती करना आसान हो जाता है।
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दरअसल 24 घंटे में वन्यजीव कम से कम एक बार पानी जरुर पीता है। ऐसे में जंगल में जितने भी पानी के स्रोत होते है वहां वनकर्मी निगरानी के लिए बैठते है। प्रदेश में करीब दो हजार और राजधानी जयपुर में वन विभाग ने करीब 70 जगह गणना के लिए चिन्हित की है जहां जंगली जीवों का मूवमेंट रहता हैं।
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इन वन्यजीवों पर रहेगी नजर
वन्यजीव गणना में बघेरे, जरख, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, सियागोह, मोर आदि शामिल किए जाते है। बाघों की गणना इस दौरान नहीं होती। बाघ की गणना अलग से होती है। हालांकि कुछ साल पहले तक बाघ की गणना भी इसी तरीके से होती थी, लेकिन सरिस्का में बाघों की गिनती के फर्जी आंकड़ों पर हुए विवाद के बाद तकनीक बदल दी गई। अब ये गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान की देखरेख में होती है।