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Duty Off का सायरन बजा: इस कम्पनी के 409 कर्मचारियों की आंखें छलक आई
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 19 Apr 2017 03:40 PM IST
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सेवानिवृत्ति के बाद साथ में खड़े कर्मचारी
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कोटा में 53 साल से चल रही इस कम्पनी में मंगलवार शाम ड्यूटी आॅफ का सायरन बजा। यह सायरन पहले खुशी देता था लेकिन, मंगलवार को इस सायरन के बाद वहां मौजूद 409 कर्मचारियों की आंखों में आंसू आ गए। यह उनका इस कम्पनी में आखिरी दिन था।
दरअसल भारत सरकार के उपक्रम इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड को बन्द कर दिया है। घाटे के कारण इस कंपनी को बन्द कर दिया गया। 410 कर्मचारियों को रिटायर कर दिया। हालांकि इनमें से एक ने हाई कोर्ट में अर्जी लगाकर स्टे ले रखा है। बाकी 409 कर्मचारियों का वीआरएस का लाभ देते हुए कार्यमुक्त कर दिया।
कोटा में इस कम्पनी की स्थापना करीब 53 साल पहले 1964 में हुई थी। जबकि यहां प्लांट ने काम करना 1968 में शुरू किया। केन्द्र सरकार के निर्णय के तहत इस उद्योग को आखिरकार बंद कर दिया गया।
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मंगलवार को जब यहां कर्मचारी पहुंचे तो पुरानी यादे ताजा करते रहे। इस दौरान हर कोई अपने जीवन के यहां बिताए गए समय को याद कर एक—दूसरे से गले मिल रहा था। हर किसी की जुबां पर चर्चा थी कि अब कोई भी यह नहीं कहेगा कि मैं आईएल का कर्मचारी हूं।
आईएल कम्पनी परमाणु संयंत्र के लिए वॉल्व व पैनल और रेलवे सिग्नल की केबल बनाती थी। यहां तक कि टैंकों और मिसाइल्स में लगने वाली चिप सहित अन्य कई तरह के उपकरण भी यहां तैयार किए जाते थे। बदलते समय के साथ कंपनी नई तकनीकों को अपडेट नहीं कर सकी, जिसके कारण यह घाटे में चली गई। जिस पर सरकार ने इसे बंद करने का फैसला किया।
कंपनी की देश—दुनिया में इतनी धाक थी कि यहां काम देखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, मोहनलाल सुखाडिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित अन्य कई दिग्गज नेता आ चुके हैं।
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दरअसल भारत सरकार के उपक्रम इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड को बन्द कर दिया है। घाटे के कारण इस कंपनी को बन्द कर दिया गया। 410 कर्मचारियों को रिटायर कर दिया। हालांकि इनमें से एक ने हाई कोर्ट में अर्जी लगाकर स्टे ले रखा है। बाकी 409 कर्मचारियों का वीआरएस का लाभ देते हुए कार्यमुक्त कर दिया।
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कोटा में इस कम्पनी की स्थापना करीब 53 साल पहले 1964 में हुई थी। जबकि यहां प्लांट ने काम करना 1968 में शुरू किया। केन्द्र सरकार के निर्णय के तहत इस उद्योग को आखिरकार बंद कर दिया गया।
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मंगलवार को जब यहां कर्मचारी पहुंचे तो पुरानी यादे ताजा करते रहे। इस दौरान हर कोई अपने जीवन के यहां बिताए गए समय को याद कर एक—दूसरे से गले मिल रहा था। हर किसी की जुबां पर चर्चा थी कि अब कोई भी यह नहीं कहेगा कि मैं आईएल का कर्मचारी हूं।
आईएल कम्पनी परमाणु संयंत्र के लिए वॉल्व व पैनल और रेलवे सिग्नल की केबल बनाती थी। यहां तक कि टैंकों और मिसाइल्स में लगने वाली चिप सहित अन्य कई तरह के उपकरण भी यहां तैयार किए जाते थे। बदलते समय के साथ कंपनी नई तकनीकों को अपडेट नहीं कर सकी, जिसके कारण यह घाटे में चली गई। जिस पर सरकार ने इसे बंद करने का फैसला किया।
कंपनी की देश—दुनिया में इतनी धाक थी कि यहां काम देखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, मोहनलाल सुखाडिया, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित अन्य कई दिग्गज नेता आ चुके हैं।