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अकेला मंदिर, जहां भोलेनाथ के अंगूठे की होती है पूजा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 10 Jul 2017 04:13 PM IST
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अचलेश्वर महादेव
- फोटो : फाइल फोटो
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अचलेश्वर महादेव मंदिर इसलिए खास है क्योंकि यहां भगवान शिव के अंगूठे की पूजा होती है। सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर यहां दूर-दूर से भोले के भक्त दर्शन के लिए आते है।
भगवान शिव के कई अनोखे मंदिर हैं। इन्हीं में से एक अचलेश्वर महादेव मंदिर। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान शिव के शिवलिंग के साथ उनके अंगूठे की पूजा होती है। अचलेश्वर महादेव का ये फेमस मंदिर राजस्थान के माउंट आबू में आबू से 11 किलोमीटर दूर अचलगढ़ की पहाड़ियों में स्थित है। संभवत: यह पहला मंदिर है जहां भगवान शिव के अंगूठे को पूजा जाता है। यहां पर शिव के अंगूठे की आकृति जमीन के नीचे बनी हुई। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां बड़ी संख्या में शिवभक्त आते है।
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भगवान शिव के कई अनोखे मंदिर हैं। इन्हीं में से एक अचलेश्वर महादेव मंदिर। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान शिव के शिवलिंग के साथ उनके अंगूठे की पूजा होती है। अचलेश्वर महादेव का ये फेमस मंदिर राजस्थान के माउंट आबू में आबू से 11 किलोमीटर दूर अचलगढ़ की पहाड़ियों में स्थित है। संभवत: यह पहला मंदिर है जहां भगवान शिव के अंगूठे को पूजा जाता है। यहां पर शिव के अंगूठे की आकृति जमीन के नीचे बनी हुई। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां बड़ी संख्या में शिवभक्त आते है।
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यह है इस मंदिर में अंगूठे की पूजा का रहस्य
अचलेश्वर महादेव
- फोटो : फाइल फोटो
इस अनूठे मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान शिव ने अपने अंगूठे पर माउंट आबू पर्वत का थाम रखा है। जिस दिन यहां से अंगूठे का निशान गायब हो जाएगा, उस दिन माउन्ट आबू का पहाड़ खत्म हो जाएगा।
स्कंध पुराण में भी आबू पर्वत की महिमा का उल्लेख है। इसके अनुसार वाराणसी जहां शिव की नगरी मानी जाती है, वहीं माउंट आबू को शिव की उपनगरी कहा जाता है। मंदिर परिसर में पंच धातुओं से बनी भगवान शिव के वाहन नंदी की भी प्रतिमा है। इसके साथ ही यहां काले पत्थर से बनी भगवान विष्णु केे विभिन्न अवतारों की झलक दिखाने वाली प्रतिमाएं है।
स्कंध पुराण में भी आबू पर्वत की महिमा का उल्लेख है। इसके अनुसार वाराणसी जहां शिव की नगरी मानी जाती है, वहीं माउंट आबू को शिव की उपनगरी कहा जाता है। मंदिर परिसर में पंच धातुओं से बनी भगवान शिव के वाहन नंदी की भी प्रतिमा है। इसके साथ ही यहां काले पत्थर से बनी भगवान विष्णु केे विभिन्न अवतारों की झलक दिखाने वाली प्रतिमाएं है।