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हाड़ौती में किसानों ने भरी हुंकार, सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 18 Jun 2017 03:16 PM IST
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किसानों की रैली
- फोटो : amar ujala
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प्रदेशभर में संभाग मुख्यालय पर चल रहे किसानों के महापड़ाव को रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। रविवार को महापड़ाव में बारां से आए हजारों किसान शामिल हुए। किसानों ने एक किलोमीटर तक रैली निकाली और उसके बाद संभागीय आयुक्त कार्यालय के सामने चल रहे महापड़ाव में शामिल हुए।
महापड़ाव में शामिल हुए किसानों का आरोप है कि उनके आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक रूख नहीं है। इसे देखकर ये लगता है कि सरकार किसानों को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे में किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि जल्द राहत नहीं पहुंचाई गई तो किसान कस्बा और मंडियां बंद कराएंगे। भारतीय किसान महासंघ के हेमराज मीणा और जगदीश शर्मा ने बताया कि अगले दो दिन में सरकार ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो किसान सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करेंगे। उधर, किसानों के आंदोलन को देखते हुए महापड़ाव स्थल पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
किसानों का कहना है कि लहसुन उत्पादन का बाजार भाव नहीं मिलने से उन्हें प्रतिबीघा 15 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। 3200 रुपए क्विंटल का भाव घोषित कर सरकार ने उन्हें झुंझुना पकड़ा दिया है। इस भाव से किसान के सम्मान को ठेस पहुंची है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी आमदनी 2022 में दोगुनी करने जा रही है लेकिन जिन हालातों से वह गुजर रहे हैं उनसे 2022 तक किसानों की आत्महत्याओं का ग्राफ चौगुना हो जाएगा।
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महापड़ाव में शामिल हुए किसानों का आरोप है कि उनके आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक रूख नहीं है। इसे देखकर ये लगता है कि सरकार किसानों को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे में किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि जल्द राहत नहीं पहुंचाई गई तो किसान कस्बा और मंडियां बंद कराएंगे। भारतीय किसान महासंघ के हेमराज मीणा और जगदीश शर्मा ने बताया कि अगले दो दिन में सरकार ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो किसान सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करेंगे। उधर, किसानों के आंदोलन को देखते हुए महापड़ाव स्थल पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
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किसानों का कहना है कि लहसुन उत्पादन का बाजार भाव नहीं मिलने से उन्हें प्रतिबीघा 15 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। 3200 रुपए क्विंटल का भाव घोषित कर सरकार ने उन्हें झुंझुना पकड़ा दिया है। इस भाव से किसान के सम्मान को ठेस पहुंची है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी आमदनी 2022 में दोगुनी करने जा रही है लेकिन जिन हालातों से वह गुजर रहे हैं उनसे 2022 तक किसानों की आत्महत्याओं का ग्राफ चौगुना हो जाएगा।
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