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अजीब फरमान! विरोध में साथ नहीं देने पर तोड़ा व्यापारिक रिश्ता

Thu, 06 Jul 2017 02:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 06 Jul 2017 02:56 PM IST
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Trash business relationship with no opposition
पीड़ित व्यापारी अशोक और घनश्याम - फोटो : amar ujala
यदि कोई व्यापारी विरोध प्रदर्शन में साथ ना दे तो ये उसका निजी फैसला है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। व्यापार संघ ने चार व्यापारियों से व्यापारिक रिश्ते नहीं रखने का फरमान केवल इसलिए जारी कर दिया क्योंकि ये उनके विरोध में शामिल नहीं हुए।
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मामला बाड़मेर की कृषि मंडी से जुड़ा हुआ है। यहां जीएसटी के विरोध में मंडी बंद है। इसी दौरान चार व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोले रखीं। इससे नाराज होकर मंडी व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने इन चार व्यापारियों को मंडी से बहिष्कृत कर दिया। साथ ही, मौखिक फरमान भी जारी कर दिया कि आगामी 15 जुलाई तक इन व्यापारियों से कोई व्यापारिक रिश्ते भी नहीं रखेगा यानी इन्हें कोई माल नहीं बेचेगा। इन चार व्यापारियों पर दंड के रूप में एक हजार रुपए की रसीद गौशाला या फिर कबूतरों के लिए अनाज के लिए कटाने की बात भी कही गई है।
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पीड़ित व्यापारी अशोक भूतड़ा और घनश्याम का आरोप हैं कि मंडी व्यापार संघ, मंडी विकास समिति, जिला अनाज व्यापार संघ ने उनके साथ व्यापार नहीं करने का तुगलकी फरमान जारी करवाया है जबकि जीएसटी का वो समर्थन कर रहे हैं।
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ये तर्क सुनकर आप रह जाएंगे दंग

Trash business relationship with no opposition
डेमो इमेज
मंडी व्यापार संघ अध्यक्ष किशनलाल वडेरा से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने इसे यह कह कर खारिज कर दिया कि ऐसी गम्भीर बात नहीं है। जबकि मंडी विकास समिति के बाबूलाल वडेरा ने इस पर तर्क देते हुए कहा कि चार व्यापारियों से कल चौबीस होंगे, इसलिए हमने ऐसा कुछ किया है। इस मामले में जिला अनाज व्यापार संघ के अध्यक्ष रमेश पारख का कहना है कि ऐसा कुछ भी हमारे द्वारा नहीं किया गया हैं।

जबकि पीड़ित व्यापारी अशोक भूतड़ा ने बताया कि वह किसी संघ का सदस्य नहीं है, बावजूद इसके उस पर कार्रवाई की गई जो उचित नहीं है। मैं परेशान हूँ और मुझे माल नहीं मिल रहा। व्यापारी घनश्याम का कहना है कि जीएसटी का समर्थन करके दुकान खोली तो फरमान जारी करके उसे काम करने से रोक दिया गया। उधर, पूर मामले में मंडी सचिव जब्बर सिंह का कहना है कि यह मेरे स्तर का मामला नहीं है। संघ ने कार्रवाई की है मैं क्या कर सकता हूं।
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