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देश में यहां तेजी से बढ़ रहा है बाघों का कुनबा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 24 Mar 2017 12:20 PM IST
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रणथम्भौर टाईगर रिजर्व
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प्रदेश का रणथम्भौर टाईगर रिजर्व और सरिस्का टाईगर रिजर्व विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन रणथम्भौर टाईगर रिजर्व आजकल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहा रहने वाले बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
गौरतलब है कि इस रिजर्व को बाघों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। राजस्थान सरकार की ओर से विधानसभा में इस बाबत जानकारी उपलब्ध कराई गई है कि इस पार्क में बाघों की संख्या अब 62 हो गई है। जो इस रिजर्व के इतिहास में सबसे अधिक है। रणथम्भौर में वर्ष 2005 की गणना में 26 बाघ गिने गए थे। एक समय था जब बाघों की संख्या राजस्थान में भी घट रही थी। सरिस्का के वर्ष 2004 में बाघ विहीन होने की घोषणा के कारण राजस्थान को विश्व पटल पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।
फिर 2008 में रणथम्भौर से बाघ और बाघिन सरिस्का में विस्थापित करने से सरिस्का में भी बाघों का कुनबा 14 हो चुका है।
नहीं मिल रहे है कुछ बाघ
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से इस रिजर्व में रहने वाले करीब आठ बाघों को ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। सरकार का कहना है कि करीब बीस प्रतिशत बाघ अधिक उम्र व प्राकृतिक कारणों के चलते मारे भी जाते है। जबकि बाघों की सुरक्षा के लिए सरकार पूर्ण रुप से सजग है।
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रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे की रिजर्व पर उनकी निर्भरता कम हो सके। साथ ही वन क्षेत्र में रहने वाले बहुत से लोगों का पुर्नवास भी किया गया है। जिससे कि जानवर सुरक्षित रह सकें और लोगों और जानवरों के बीच टकराव नहीं हो।
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गौरतलब है कि इस रिजर्व को बाघों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। राजस्थान सरकार की ओर से विधानसभा में इस बाबत जानकारी उपलब्ध कराई गई है कि इस पार्क में बाघों की संख्या अब 62 हो गई है। जो इस रिजर्व के इतिहास में सबसे अधिक है। रणथम्भौर में वर्ष 2005 की गणना में 26 बाघ गिने गए थे। एक समय था जब बाघों की संख्या राजस्थान में भी घट रही थी। सरिस्का के वर्ष 2004 में बाघ विहीन होने की घोषणा के कारण राजस्थान को विश्व पटल पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।
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फिर 2008 में रणथम्भौर से बाघ और बाघिन सरिस्का में विस्थापित करने से सरिस्का में भी बाघों का कुनबा 14 हो चुका है।
नहीं मिल रहे है कुछ बाघ
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से इस रिजर्व में रहने वाले करीब आठ बाघों को ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। सरकार का कहना है कि करीब बीस प्रतिशत बाघ अधिक उम्र व प्राकृतिक कारणों के चलते मारे भी जाते है। जबकि बाघों की सुरक्षा के लिए सरकार पूर्ण रुप से सजग है।
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रिजर्व के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे की रिजर्व पर उनकी निर्भरता कम हो सके। साथ ही वन क्षेत्र में रहने वाले बहुत से लोगों का पुर्नवास भी किया गया है। जिससे कि जानवर सुरक्षित रह सकें और लोगों और जानवरों के बीच टकराव नहीं हो।