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शेरनी 'तेजिका' ने लकवे को दी 15 दिन में मात, दिए 3 नन्हे राजकुमार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 22 May 2017 05:43 PM IST
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फाइल फोटो
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जयपुर के नाहरगढ़ बायोलोजिकल पार्क में रविवार को शेरनी तेजिका ने तीन शावकों को जन्म दिया। शावकों के जन्म से पूरे जैविका उद्यान में खुशियां छा गई। तेजिका के लिए ये खुशियों का ये पल इतना आसान नहीं था। उसने एक बुरा दौर भी देखा था।
तेजिका के शरीर का कुछ हिस्सा करीब एक साल पहले ही लकवाग्रस्त हो गया था। तेजिका के लिए यह समय बेहद मुश्किल था, इस दौरान वह चलने फिरने में भी असमर्थ सी हो गई थी। लेकिन सही समय पर मिले सही ईलाज की वजह से वह फिर से उस परेशानी से पार पा सकी। जानकारी के मुताबिक तेजिका पिछले साल सितंबर के आखिर में बीमार हो गई। उसके शरीर के पीछे के पांवों का हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया। गुजरात के जूनागढ़ से लाई गई तेजिका की इस स्थिति को लेकर पार्क प्रशासन भी परेशान हो गया था। तेजिका के पांवों वाले हिस्से ने काम करना बिल्कुल बंद सा कर दिया था।
एक्सपर्ट डॉ. अरविंद माथुर ने उसका इलाज इलाज किया। इलाज के लिए उसे बेहोश कर इंटरवर्टिकल इंजेक्शन दिए गए। इसके साथ ही एक्यूनोथैरेपी के माध्यम से उसका ट्रीटमेंट किया गया। ईलाज के साथ ही पांच साल की शेरनी तेजिका का जज्बा भी था कि पैराइलाइसिस जैसी बीमारी को पन्द्रह से बीस दिन में भी पछाड़ कर रख दिया। फिर नाहरगढ़ बायोलोजिकल पार्क ने उसकी खास केयर भी की। अब तेजिका ने पार्क को खुशियां दी हैं।
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तेजिका के शरीर का कुछ हिस्सा करीब एक साल पहले ही लकवाग्रस्त हो गया था। तेजिका के लिए यह समय बेहद मुश्किल था, इस दौरान वह चलने फिरने में भी असमर्थ सी हो गई थी। लेकिन सही समय पर मिले सही ईलाज की वजह से वह फिर से उस परेशानी से पार पा सकी। जानकारी के मुताबिक तेजिका पिछले साल सितंबर के आखिर में बीमार हो गई। उसके शरीर के पीछे के पांवों का हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया। गुजरात के जूनागढ़ से लाई गई तेजिका की इस स्थिति को लेकर पार्क प्रशासन भी परेशान हो गया था। तेजिका के पांवों वाले हिस्से ने काम करना बिल्कुल बंद सा कर दिया था।
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एक्सपर्ट डॉ. अरविंद माथुर ने उसका इलाज इलाज किया। इलाज के लिए उसे बेहोश कर इंटरवर्टिकल इंजेक्शन दिए गए। इसके साथ ही एक्यूनोथैरेपी के माध्यम से उसका ट्रीटमेंट किया गया। ईलाज के साथ ही पांच साल की शेरनी तेजिका का जज्बा भी था कि पैराइलाइसिस जैसी बीमारी को पन्द्रह से बीस दिन में भी पछाड़ कर रख दिया। फिर नाहरगढ़ बायोलोजिकल पार्क ने उसकी खास केयर भी की। अब तेजिका ने पार्क को खुशियां दी हैं।
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