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25 लाख रुद्राक्ष से बनाया गया है दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 10 Jul 2017 07:35 PM IST
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रुद्राक्ष का शिवलिंग
- फोटो : amar ujala
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शिवलिंग तो आपने मंदिरों में देखे होंगे, लेकिन हम यहां आपको ऐसे शिवलिंग का दर्शन करा रहे हैं जिसे विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग बताया जा रहा है।
दरअसल, जोधपुर के ओसियां में इस शिवलिंग का निर्माण किया गया है। खास बात इस शिवलिंग की ये है कि इसमें 25 लाख रुद्राक्ष का उपयोग शिवलिंग को आकार देने में किया गया है। इसकी ऊंचाई भी सवा 33 फीट है। आयोजकों का दावा है कि यह विश्व में सबसे ऊंचा शिवलिंग है। इसका निर्माण यहां 9 से 17 जुलाई तक चलने वाले महाभिषेक के लिए किया गया है। शिवलिंग का निर्माण करने में तीन महीने लगे और इसे कल से भक्तों के लिए खोल दिया गया है।
इसके निर्माण में लाखों रुद्राक्ष का उपयोग करने के साथ ही सीमेंट, बजरी और अन्य भवन निर्माण सामग्री भी काम में ली गई है। उधर, यहां दूर-दराज के लोग शिवलिंग के दर्शनों के लिए बाबा भोलनाथ के जयकारे लगाते हुए पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने बड़े आकार के शिवलिंग के दर्शन उन्हें जीवन में मिलेंगे।
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दरअसल, जोधपुर के ओसियां में इस शिवलिंग का निर्माण किया गया है। खास बात इस शिवलिंग की ये है कि इसमें 25 लाख रुद्राक्ष का उपयोग शिवलिंग को आकार देने में किया गया है। इसकी ऊंचाई भी सवा 33 फीट है। आयोजकों का दावा है कि यह विश्व में सबसे ऊंचा शिवलिंग है। इसका निर्माण यहां 9 से 17 जुलाई तक चलने वाले महाभिषेक के लिए किया गया है। शिवलिंग का निर्माण करने में तीन महीने लगे और इसे कल से भक्तों के लिए खोल दिया गया है।
इसके निर्माण में लाखों रुद्राक्ष का उपयोग करने के साथ ही सीमेंट, बजरी और अन्य भवन निर्माण सामग्री भी काम में ली गई है। उधर, यहां दूर-दराज के लोग शिवलिंग के दर्शनों के लिए बाबा भोलनाथ के जयकारे लगाते हुए पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने बड़े आकार के शिवलिंग के दर्शन उन्हें जीवन में मिलेंगे।
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अभिषेक के लिए ऋषिकेश से लाया गया जल
रुद्राक्ष का शिवलिंग
- फोटो : amar ujala
सावन की शुरुआत सोमवार से होने के साथ ही यहां भक्तों की आवाजाही भी प्रभु के शिवलिंग रूप के दर्शन करने के लिए शुरू हो गई है। आज यहां महाभिषेक के साथ कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए। यहां 17 जुलाई तक रोजाना रुद्राभिषेक, महारुद्र यज्ञ, शिव महापुराण कथा, शिव बरात और महाआरती के आयोजन होंगे। सबसे ऊंचे शिवलिंग को लेकर कथाकार बटुकभाई व्यास का नाम चार बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। आज भी यहां इसके लिए टीम आई हुई है।
बटुक भाई ने बताया की इस खास शिवलिंग के महाभिषेक के लिए ऋषिकेश से टैंकरों में गंगाजल लाया जा रहा है। जोधपुर से मानसरोवर गए संतों से भी जल मंगवाया गया है। शिवलिंग का निर्माण करने के लिए नेपाल के नेपालगंज और विराट नगर रुद्राक्ष मंगवाए गए हैं।
बटुक भाई ने बताया की इस खास शिवलिंग के महाभिषेक के लिए ऋषिकेश से टैंकरों में गंगाजल लाया जा रहा है। जोधपुर से मानसरोवर गए संतों से भी जल मंगवाया गया है। शिवलिंग का निर्माण करने के लिए नेपाल के नेपालगंज और विराट नगर रुद्राक्ष मंगवाए गए हैं।