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सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन परिलाभ नहीं देने पर हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 31 Jan 2018 07:29 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत से बरी होने के बाद यदि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अपील लंबित है तो इस आधार पर उसके पेंशन परिलाभ नहीं रोके जा सकते। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के रोके गए समस्त पेंशन परिलाभ नौ फीसदी ब्याज सहित दो माह में अदा करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश सेवानिवृत्त गिरदावर गोमाराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्र शाह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2001 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की शिकायत दर्ज कराई गई। जिसके चलते उसे अप्रैल 2001 में निलंबित कर दिया गया। याचिकाकर्ता के 31 अक्टूबर 2001 को सेवानिवृत्त होने पर उसके पेंशन परिलाभ रोके गए। वहीं उसके खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाया गया। जिसमें वह 4 अप्रैल 2016 को बरी हो गए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेंशन अदा करने को लेकर याचिका दायर की गई। जिसमें राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि निचली अदालत के बरी करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित हैं। ऐसे में राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के तहत आपराधिक मामला लंबित होने के चलते याचिकाकर्ता को पेंशन परिलाभ नहीं दिए जा सकते। जिसका विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता निचली अदालत से बरी हो चुका है। अपील लंबित होने के आधार पर पेंशन परिलाभ नहीं रोके जा सकते।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने दो माह में ब्याज सहित पेंशन परिलाभ अदा करने को कहा है।
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न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश सेवानिवृत्त गिरदावर गोमाराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्र शाह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2001 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की शिकायत दर्ज कराई गई। जिसके चलते उसे अप्रैल 2001 में निलंबित कर दिया गया। याचिकाकर्ता के 31 अक्टूबर 2001 को सेवानिवृत्त होने पर उसके पेंशन परिलाभ रोके गए। वहीं उसके खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाया गया। जिसमें वह 4 अप्रैल 2016 को बरी हो गए।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेंशन अदा करने को लेकर याचिका दायर की गई। जिसमें राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि निचली अदालत के बरी करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित हैं। ऐसे में राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के तहत आपराधिक मामला लंबित होने के चलते याचिकाकर्ता को पेंशन परिलाभ नहीं दिए जा सकते। जिसका विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता निचली अदालत से बरी हो चुका है। अपील लंबित होने के आधार पर पेंशन परिलाभ नहीं रोके जा सकते।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने दो माह में ब्याज सहित पेंशन परिलाभ अदा करने को कहा है।