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Rajasthan: सिक्किम में शहीद तीनों जवान का आज होगा अंतिम संस्कार, पार्थिव शरीर पहुंचने पर गांव में शोक की लहर

Sun, 25 Dec 2022 11:55 AM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Sun, 25 Dec 2022 11:55 AM IST
सार

सूबेदार गुमान सिंह दस महीने में रिटायर होने वाले थे। वे पांच दिन पहले ही छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे। उनके शहीद होने की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर है। वहीं माजरी के ग्रामीणों ने शहीद मनोज के लिए तिरंगा यात्रा निकाली है।

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The last rites of the Rajasthan three soldiers martyred in Sikkim will be held today
गांव लाया जा रहा शहीदों का पार्थिव शरीर - फोटो : Social Media

विस्तार

सिक्किम के जेमा में शुक्रवार को आर्मी का ट्रक खाई में गिरने से 16 जवान शहीद हो गए थे। हादसे में राजस्थान के तीन जवान भी शहीद हो गए। तीनों जवान का पार्थिव शरीर रविवार को उनके गांव पहुंचेगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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सिक्किम हादसे में जैसलमेर के जोगा गांव के रहने वाले सूबेदार गुमान सिंह सोलंकी, जोधपुर के सूखाराम और झुंझुनू के मनोज कुमार यादव शहीद हो गए। शहीद मनोज यादव की पार्थिव देह शनिवार देर रात झुंझुनू के पचेरी कलां थाने पहुंची। माजरी के ग्रामीणों ने मनोज के लिए तिरंगा यात्रा निकाली है। 'मनोज यादव अमर रहे' के जयकारे से माजरी गुंजामान है। वहीं जैसलमेर के गुमान सिंह का भी पार्थिव देह जोगा गांव लाई जा रही है। 
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मनोज कुमार महज 27 साल की उम्र में देश के लिए शहीद हो गए। मनोज झुंझुनू के सिंघाना पंचायत समिति के मांजरी गांव में रहने वाले थे। वे डेढ़ महीने पहले ही घर आए थे और छुट्टियां बिताकर वापस ड्यूटी पर गए थे। वे 1871 फील्ड रेजीमेंट में लांस नायक पद पर कार्यरत थे। उनका बड़ा भाई प्रमोद कुमार भी बीएसएफ में तैनात है। 

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मनोज का 2018 में विवाह हुआ था। मनोज की डेढ़ साल की एक बेटी है। वे इस बार जब घर आए थे, तब फरवरी में वापस आने का वादा कर के गए थे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि 'मैं उस दिन की इंतजार कर रहा हूं, जब मेरी बेटी मुझे पहली बार पापा बोलेगी... उससे बड़ा दिन क्या होगा...।' शहीद के दोस्त संदीप कुमार ने बताया कि मनोज में सेना के प्रति जुनून था। रोज सवेरे चार बजे उठकर दौड़ने जाता था। जब खुद का चयन हो गया तो गांव के दूसरे लड़कों को भी प्रेरित किया। मनोज के निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है।


जैसलमेर में भी शहीद के घर पसरा मातम

हादसे में जैसलमेर के जोगा गांव के निवासी सूबेदार गुमान सिंह भी शहीद हो गए थे। सूबेदार गुमान सिंह पांच दिन पहले ही जैसलमेर से छुट्टी से वापस ड्यूटी पर गए थे। गुमान सिंह के परिवार में मां, पत्नी रेखा कंवर और पांच बच्चे हैं। जिनमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं। गुमान सिंह 27 साल पहले भारतीय सेना में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि 10 महीने बाद ही वे सेना से रिटायर होने वाले थे। उनके शहीद होने की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर है। सुखाराम का भी गांव सांवतकुआं में अंतिम संस्कार होगा। इसके लिए पार्थिव देह जोधपुर से गांव ले जाई जा रही है।

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