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रेगिस्तान से आई खुशखबरी, गोडावण की संख्या 11 से 31 हुई
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 15 Sep 2017 01:55 PM IST
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गोडावण
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विशाल भू-भाग में फैले मरूस्थलीय जिले जैसलमेर के पोकरण क्षेत्र से खुशीखबरी आई है। यहां द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के रूप में पहचाना जाने वाला दुर्लभ राज्यपक्षी गोडावण की संख्या में पिछले तीन वर्षों में तीन गुना इजाफा हुआ है। पोकरण क्षेत्र से आई इस खबर के बाद वन्य प्रेमियों में खुशी की लहर है।
जानकारी के अनुसार 2015 में पोकरण के गोडावण रहवासी क्लोजर में गोडावण की संख्या 11 थी जो अब बढ़कर 2017 में 31 हो गई है। गोडावण के अंडों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना ही गोडावण की संख्या बढ़ने का सबसे बडा कारण है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गत साल यहां आधा दर्जन मादा गोडावण ने अंदे दिए थे। वहीं इस वर्ष करीब 11 मादा गोडावण ने अंडे दिए हैं। इनमें से नन्हे गोडावण इन दिनों अठखेलियां कर जंगल में हर किसी के मन को भा रहे हैं।
गोडावण संरक्षण को लेकर विभाग स्तर पर सराहनीय प्रयास किए गए हैं। गोडावण प्रजनन व रहवासी स्थलों पर खुफिया कैमरों की नजर, अंडों के सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधन, क्लोजरों में पानी की समुचित व्यवस्था, गोडावण रहवासी क्लोजरों में अन्य हिंसक वन्यजीवों के प्रवेश पर पाबंदी जैसी सुविधाओं का विस्तार कर गोडावण संरक्षण को लेकर विशेष कार्य किए गए हैं।
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जानकारी के अनुसार 2015 में पोकरण के गोडावण रहवासी क्लोजर में गोडावण की संख्या 11 थी जो अब बढ़कर 2017 में 31 हो गई है। गोडावण के अंडों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना ही गोडावण की संख्या बढ़ने का सबसे बडा कारण है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गत साल यहां आधा दर्जन मादा गोडावण ने अंदे दिए थे। वहीं इस वर्ष करीब 11 मादा गोडावण ने अंडे दिए हैं। इनमें से नन्हे गोडावण इन दिनों अठखेलियां कर जंगल में हर किसी के मन को भा रहे हैं।
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गोडावण संरक्षण को लेकर विभाग स्तर पर सराहनीय प्रयास किए गए हैं। गोडावण प्रजनन व रहवासी स्थलों पर खुफिया कैमरों की नजर, अंडों के सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधन, क्लोजरों में पानी की समुचित व्यवस्था, गोडावण रहवासी क्लोजरों में अन्य हिंसक वन्यजीवों के प्रवेश पर पाबंदी जैसी सुविधाओं का विस्तार कर गोडावण संरक्षण को लेकर विशेष कार्य किए गए हैं।
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