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प्लास्टिक पर सरकार की रोक ही पर्याप्त नहीं - खींवसर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 06 Jun 2017 06:53 PM IST
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plastic
- फोटो : Getty Images
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वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने माना है कि प्लास्टिक पर सरकार की रोक पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि आमजन प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति लोग जागरूक हों। लोग एक जुट होकर प्लास्टिक को न कहें।
खींवसर मंगलवार को जयपुर में जामडोली के पास इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप डवलपमेंट में भारतीय उद्योग परिसंघ-राजस्थान, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मण्डल एवं इण्डियन ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सिल जयपुर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके विभाग का प्रयास होगा कि हम इसके उपयोग को ज्यादा से ज्यादा हतोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हमें प्राकृतिक सुकून देने वाले, ऊर्जा व पानी की बचत आधारित आवासीय भवनों व कार्यालयों के निर्माण पर जोर देना होगा।
उन्होंने कहा कि नगर नियोजन, भवन निर्माताओं व औद्योगिक घरानों को ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा पर आधारित ऎसे भवनों के निर्माण पर जोर देना होगा, जिनमें निर्माण की सामग्री ऎसी हो जिससे भवन प्राकृतिक रूप से ठण्डे रहें, उनसे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन न हो व उनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि प्राचीन भवनों का निर्माण इस प्रकार से किया जाता था, जिससे उनमें रहने वाले व्यक्ति बिना पंखे, कूलर, एसी व कृत्रिम रोशनी के रह सकते थे।
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खींवसर मंगलवार को जयपुर में जामडोली के पास इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप डवलपमेंट में भारतीय उद्योग परिसंघ-राजस्थान, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मण्डल एवं इण्डियन ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सिल जयपुर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके विभाग का प्रयास होगा कि हम इसके उपयोग को ज्यादा से ज्यादा हतोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हमें प्राकृतिक सुकून देने वाले, ऊर्जा व पानी की बचत आधारित आवासीय भवनों व कार्यालयों के निर्माण पर जोर देना होगा।
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उन्होंने कहा कि नगर नियोजन, भवन निर्माताओं व औद्योगिक घरानों को ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा पर आधारित ऎसे भवनों के निर्माण पर जोर देना होगा, जिनमें निर्माण की सामग्री ऎसी हो जिससे भवन प्राकृतिक रूप से ठण्डे रहें, उनसे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन न हो व उनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि प्राचीन भवनों का निर्माण इस प्रकार से किया जाता था, जिससे उनमें रहने वाले व्यक्ति बिना पंखे, कूलर, एसी व कृत्रिम रोशनी के रह सकते थे।