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रणथम्भौर से आई खुशखबरी, बाघिन टी—19 के साथ दिखे चार नन्हें शावक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 23 Jun 2017 02:05 PM IST
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राजस्थान के सवाईमाधोपुर में शुक्रवार को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से खुशखबरी मिली है। यहां काफी लम्बे समय के बाद बाघों का कुनबे में नन्हें शावक दिखने की सूचना है।
जानकारी के अनुसार, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में शुक्रवार को बाघिन टी—19 के साथ चार नन्हें शावक देखने को मिले हैं। बाघिन टी—19 का यहां कृष्णा नाम से जाना जाता है जिसके साथ जोन नम्बर—4 के लकडदा इलाके में चार शावक होने की वन विभाग के अधिकारियों ने सूचना दी। जिसके बाद से ही प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। माना जा रहा है कि अब जल्द ही यहां बाघों की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही, पर्यटकों की साइटिंग की इच्छा भी पूरी होगी। नन्हें शावकों को देखने के लिए अभी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। हालांकि, यहां जैसे ही नए मेहमानों की जानकारी मिली तभी से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
उधर, अलवर के सरिस्का अभयारण्य में बाघ एसटी—9 के पूंछ में संक्रमण होने की वजह से वह गंभीर रूप से घायल है। घाव में दर्द होने के कारण वह इन दिनों काफी आक्रामक भी हो गया है। जिसके बाद जयपुर से डॉक्टरों की टीम सरिस्का के लिए रवाना की गई है। साथ ही, यहां आसपास के इलाकों में भी खास चौकसी रखी जा रही है। इसका कारण बाघ की आक्रामकता को माना जा रहा है।
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जानकारी के अनुसार, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में शुक्रवार को बाघिन टी—19 के साथ चार नन्हें शावक देखने को मिले हैं। बाघिन टी—19 का यहां कृष्णा नाम से जाना जाता है जिसके साथ जोन नम्बर—4 के लकडदा इलाके में चार शावक होने की वन विभाग के अधिकारियों ने सूचना दी। जिसके बाद से ही प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। माना जा रहा है कि अब जल्द ही यहां बाघों की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही, पर्यटकों की साइटिंग की इच्छा भी पूरी होगी। नन्हें शावकों को देखने के लिए अभी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। हालांकि, यहां जैसे ही नए मेहमानों की जानकारी मिली तभी से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
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उधर, अलवर के सरिस्का अभयारण्य में बाघ एसटी—9 के पूंछ में संक्रमण होने की वजह से वह गंभीर रूप से घायल है। घाव में दर्द होने के कारण वह इन दिनों काफी आक्रामक भी हो गया है। जिसके बाद जयपुर से डॉक्टरों की टीम सरिस्का के लिए रवाना की गई है। साथ ही, यहां आसपास के इलाकों में भी खास चौकसी रखी जा रही है। इसका कारण बाघ की आक्रामकता को माना जा रहा है।
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