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वसूली करने वाले अफसरों पर क्या कार्रवाई कर रहा है निगम-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 30 Aug 2017 07:48 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भी शहर में वैंडिंग और नॉन वैंडिंग जोन घोषित नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने नगर निगम से पूछा है कि फुटकर व्यवसायियों से वसूली करने वाले अफसरों के खिलाफ प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है। अदालत में उपस्थित निगम आयुक्त, हवामहल पश्चिम जोन आयुक्त और सतर्कता आयुक्त को कहा कि क्यों न अवमानना करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश रक्षक सोसायटी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने तीनों अधिकारियों को कल अदालत में पेश होने के आदेश भी दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वह शपथ पत्र पेश कर बताए कि कितने अफसर हवामहल जोन पश्चिम इलाके में फुटकर व्यवसायियों से कैरिंग चार्ज वसूल रहे हैं। इसके अलावा कौनसा अफसर अवैध वसूली कर रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों अधिकारियों को तत्काल पेश होने के आदेश दिए। जिसकी पालना में तीनों अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत ने कहा कि फुटपाथ व्यवसायियों के लिए तीन साल पहले कानून बन चुका है। इसके अलावा अदालत भी वैंडिंग जोन घोषित नहीं होने तक ऐसे व्यवसायियों को हटाने पर रोक लगा चुकी है, फिर भी पालना क्यों नहीं हो रही है? इस पर निगम की ओर से पालना करने के लिए छह माह का समय मांगा गया। निगम ने कहा कि ठेकेदार के मार्फत जोन चिन्हित किए जा रहे हैं। निगम के जवाब पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि निगम के पास भारी अमला होने के बाद भी ठेकेदार से काम लेने की क्या जरूरत है। वहीं अदालत ने निगम को समय देने से इनकार करते हुए तीनों अधिकारियों को कल पेश होकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश रक्षक सोसायटी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने तीनों अधिकारियों को कल अदालत में पेश होने के आदेश भी दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वह शपथ पत्र पेश कर बताए कि कितने अफसर हवामहल जोन पश्चिम इलाके में फुटकर व्यवसायियों से कैरिंग चार्ज वसूल रहे हैं। इसके अलावा कौनसा अफसर अवैध वसूली कर रहा है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों अधिकारियों को तत्काल पेश होने के आदेश दिए। जिसकी पालना में तीनों अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत ने कहा कि फुटपाथ व्यवसायियों के लिए तीन साल पहले कानून बन चुका है। इसके अलावा अदालत भी वैंडिंग जोन घोषित नहीं होने तक ऐसे व्यवसायियों को हटाने पर रोक लगा चुकी है, फिर भी पालना क्यों नहीं हो रही है? इस पर निगम की ओर से पालना करने के लिए छह माह का समय मांगा गया। निगम ने कहा कि ठेकेदार के मार्फत जोन चिन्हित किए जा रहे हैं। निगम के जवाब पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि निगम के पास भारी अमला होने के बाद भी ठेकेदार से काम लेने की क्या जरूरत है। वहीं अदालत ने निगम को समय देने से इनकार करते हुए तीनों अधिकारियों को कल पेश होकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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