{"_id":"5924369e4f1c1bd33c535a3b","slug":"tejika-s-cubs-die","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही! नहीं बच पाया शेरनी तेजिका का नन्हा शावक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही! नहीं बच पाया शेरनी तेजिका का नन्हा शावक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 23 May 2017 06:55 PM IST
विज्ञापन
तेजिका शेरनी अपने चार शावकों के साथ
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाहरगढ़ बायोलोजिकल पार्क में बाघिन तेजिका लाई खुशियों पर एक दाग लग गया। शेरनी तेजिका के एक शावक की मंगलवार शाम मौत हो गई। यूं तो यह शावक जन्म से ही कमजोर बताया जा रहा था, लेकिन सवाल अब पार्क प्रशासन पर भी उठाए जा रहे हैं।
मामले के तहत इस शावक ने जन्म के करीब 16 घंटे बाद तक मां का दूध नहीं पिया। वन विभाग बाद में जागा और तब जाकर इस शावक को शेरनी से अलग कर इलाज शुरू किया गया। दरअसल शेरनी तेजिका ने शनिवार रात को पहले तीन शावकों को जन्म दिया। इसके कुछ घंटों बाद तेजिका ने दो और शावक को जन्म दिया। इन दो शावकों में से एक मृत था और दूसरा बेहद कमजोर था। मां के पास पहले से मौजूद तीन शावक तो दूध पी रहे थे, लेकिन चौथा और कमजोर शावक दूध नहीं पी पा रहा था। पार्क के प्रबंधन ने 16 घंटे तक इंतजार किया। जब कुछ होता नजर नहीं आया तब जाकर इस शावक को मां से अलग करके पोस्ट नेटल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया।
इस मामले में कहा जा रहा है कि सोलह घंटे का इंतजार भारी पड़ गया। चूंकि एन्क्लोजर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, पल पल पर निगाह रखी जा रही थी, तो इस शावक को पहले ही शिफ्ट कर लेना चाहिए था। पहले से ही कमजोर शावक का कई घंटे निकालना भारी पड़ गया। शावक की मौत के बाद उसे बचाने में जुटी चिकित्सकीय टीम भी निराश हो गई। उधर बायोलोजिकल पार्क में भी मायूसी छा गई कि कई प्रयासों के बावजूद जान नहीं बच पाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले के तहत इस शावक ने जन्म के करीब 16 घंटे बाद तक मां का दूध नहीं पिया। वन विभाग बाद में जागा और तब जाकर इस शावक को शेरनी से अलग कर इलाज शुरू किया गया। दरअसल शेरनी तेजिका ने शनिवार रात को पहले तीन शावकों को जन्म दिया। इसके कुछ घंटों बाद तेजिका ने दो और शावक को जन्म दिया। इन दो शावकों में से एक मृत था और दूसरा बेहद कमजोर था। मां के पास पहले से मौजूद तीन शावक तो दूध पी रहे थे, लेकिन चौथा और कमजोर शावक दूध नहीं पी पा रहा था। पार्क के प्रबंधन ने 16 घंटे तक इंतजार किया। जब कुछ होता नजर नहीं आया तब जाकर इस शावक को मां से अलग करके पोस्ट नेटल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया।
विज्ञापन
इस मामले में कहा जा रहा है कि सोलह घंटे का इंतजार भारी पड़ गया। चूंकि एन्क्लोजर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, पल पल पर निगाह रखी जा रही थी, तो इस शावक को पहले ही शिफ्ट कर लेना चाहिए था। पहले से ही कमजोर शावक का कई घंटे निकालना भारी पड़ गया। शावक की मौत के बाद उसे बचाने में जुटी चिकित्सकीय टीम भी निराश हो गई। उधर बायोलोजिकल पार्क में भी मायूसी छा गई कि कई प्रयासों के बावजूद जान नहीं बच पाई।
विज्ञापन