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Success Story: फीस लौटा दे स्कूल, इसलिए लाया 96% मार्क्स
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 30 May 2017 02:37 PM IST
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अनुभव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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सफलता चाहिए तो उसके लिए कोई न कोई वजह बनाइए... जिंदगी में सफल होने का यही फलसफा है। यह कहना है अनुभव सिंह का। अनुभव संबंध तो एक बेहद गरीब परिवार से रखते हैं, लेकिन उनकी चाहत और जज्बा बड़ा है।
अनुभव ने सीबीएसई के बोर्ड एग्जाम्स में 96 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उनके पिता जयपुर की मुहाना मंडी में सब्जी का ठेला लगाते हैं। अनुभव भी रोज सुबह चार बजे उठकर पापा की मदद करते हैं। फिर स्कूल जाते हैं। अपनी सफलता के पीछे अनुभव अपना एक अलग कारण बताते हैं। वे कहते हैं कि सफलता बेवजह नहीं मिलती। छोटी हो या बड़ी कोई न कोई वजह जरूर होती है। मेरे लिए एक अनोखी वजह थी। दरअसल जिस स्कूल में मैं पढ़ता था उसके मालिक से मेरे पापा ने मेरी फीस माफ करने के लिए कहा। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।
स्कूल मालिक ने एक शर्त रखी कि यदि मेरे 95 फीसदी से ज्यादा अंक आए तो वे पूरी फीस रिटर्न कर देंगे। बस मेरे लिए यही वजह थी। मैं अपने अंक तो अच्छे लाना ही चाहता था साथ ही मेरे पापा की मदद भी करना चाहता था। मैंने 96 फीसदी अंक अर्जित किए।
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वे बताते हैं कि इसके लिए मैंने खास शेड्युल अपनाया। इसमें सुबह चार बजे उठकर सात बजे तक पापा के साथ सब्जी के काम में मदद करता। एक बजे तक स्कूल में रहता और फिर पांच बजे तक ट्यूशन पर पढ़ता। शाम से लेकर रात को 12 बजे तक पढ़ाई करता। मैंने कोशिश की कि घर के हालात में भी हाथ बटां सकूं और पढ़ाई में ध्यान भी दे सकूं।
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अनुभव ने सीबीएसई के बोर्ड एग्जाम्स में 96 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उनके पिता जयपुर की मुहाना मंडी में सब्जी का ठेला लगाते हैं। अनुभव भी रोज सुबह चार बजे उठकर पापा की मदद करते हैं। फिर स्कूल जाते हैं। अपनी सफलता के पीछे अनुभव अपना एक अलग कारण बताते हैं। वे कहते हैं कि सफलता बेवजह नहीं मिलती। छोटी हो या बड़ी कोई न कोई वजह जरूर होती है। मेरे लिए एक अनोखी वजह थी। दरअसल जिस स्कूल में मैं पढ़ता था उसके मालिक से मेरे पापा ने मेरी फीस माफ करने के लिए कहा। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।
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स्कूल मालिक ने एक शर्त रखी कि यदि मेरे 95 फीसदी से ज्यादा अंक आए तो वे पूरी फीस रिटर्न कर देंगे। बस मेरे लिए यही वजह थी। मैं अपने अंक तो अच्छे लाना ही चाहता था साथ ही मेरे पापा की मदद भी करना चाहता था। मैंने 96 फीसदी अंक अर्जित किए।
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वे बताते हैं कि इसके लिए मैंने खास शेड्युल अपनाया। इसमें सुबह चार बजे उठकर सात बजे तक पापा के साथ सब्जी के काम में मदद करता। एक बजे तक स्कूल में रहता और फिर पांच बजे तक ट्यूशन पर पढ़ता। शाम से लेकर रात को 12 बजे तक पढ़ाई करता। मैंने कोशिश की कि घर के हालात में भी हाथ बटां सकूं और पढ़ाई में ध्यान भी दे सकूं।