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नदी में गाड़ी सहित बह गए एसडीएम, तलाश जारी, ढाई किमी दूर सुरक्षित निकला ड्राईवर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 14 Jul 2017 07:31 PM IST
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एसडीएम को ढूंढने के लिए बचाव कार्य
- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान के बांसवाड़ा में पिछले कई दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है। इससे क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर हैं। बारिश का कहर आज सुबह भी देखने को मिला, जब जिले के कुशालगढ़ क्षेत्र के उपखंड अधिकारी रामेश्वर दयाल मीणा गाड़ी सहित एक स्थानीय नदी मे बह गए।
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जानकारी के अनुसार मीणा बोलेरो गाड़ी से बांसवाड़ा से अपने घर कुशालगढ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एनएच 113 पर भोयडी घाटी के पास रास्ते में आने वाली बारी नदी के तेज बहाव में उनकी गाड़ी बहने की सूचना मिली है।
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गाड़ी का चालक अशोक घटना स्थल से करीब ढाई किलोमीटर दूर सुरक्षित निकल गया है। ड्राइवर ने ही स्थानीय प्रशासन को घटना की जानकारी दी है।
इसके बाद जिलास्तरीय अधिकारियों में हड़कंप मंचा हुआ है। एसडीएम को खोजने के लिए मौके पर अभियान छेड़ा हुआ है।
मंत्री-कलक्टर मौके पर, पांच किलोमीटर बहाव क्षेत्र में खोज जारी
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- फोटो : file photo
एसडीएम को बहे चार घंटे हो गए, लेकिन अब तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है। सूचना मिलने के बाद पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री धनसिंह रावत और बांसवाड़ा जिला कलक्टर भगवती प्रसाद सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
इससे पूर्व उपखंड अधिकारी की खोज के लिए कलिंजर और कुशलगढ़ थानों की पुलिस मौके पर पहुंची, जिसने गोताखोरों का इंतजाम किया। गोताखोर बार-बार डूबकी लगाकर मीणा को ढूढने का प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन अब तक गाड़ी और एसडीएम का कोई पता नहीं चल पाया है। खोज का दायरा बढ़ाकर ढाई किलोमीटर से अब पांच किलोमीटर तक कर दिया है।
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बरसात का पानी यहां पहाड़ों से बहकर आता है, जिससे पानी मटमैला हो जाता है। गोताखारों को पानी के भीतर देखने में परेशानी हो रही है।
इससे पूर्व उपखंड अधिकारी की खोज के लिए कलिंजर और कुशलगढ़ थानों की पुलिस मौके पर पहुंची, जिसने गोताखोरों का इंतजाम किया। गोताखोर बार-बार डूबकी लगाकर मीणा को ढूढने का प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन अब तक गाड़ी और एसडीएम का कोई पता नहीं चल पाया है। खोज का दायरा बढ़ाकर ढाई किलोमीटर से अब पांच किलोमीटर तक कर दिया है।
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बरसात का पानी यहां पहाड़ों से बहकर आता है, जिससे पानी मटमैला हो जाता है। गोताखारों को पानी के भीतर देखने में परेशानी हो रही है।