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ये है वजह, जिसके कारण हर साल सामने आते हैं 'बागी'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 22 Aug 2017 02:33 PM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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ताज की लड़ाई में दोस्त दुश्मन बन जाते हैं और कल तक साथ रहने वाले बागी हो जाते हैं। कुर्सी की लड़ाई होती ही ऐसी है।
बगावत के सुर राजनीति के गलियारों से लेकर छात्रों के बीच पैठ बना चुके हैं। एक नजर राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों पर डालें तो बागियों को जीत रास आती है। मतलब यह कि अब तक जितने भी छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए हैं, उनमें संगठन से बगावत करने वालों की संख्या काफी है। फिर चाहे एबीवीपी हो या एनएसयूआई, बगावत करने वाले प्रत्याशी छात्रों की पसंद भी बनते हैं।
अब तक 34 छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं, जिनमें से करीब 17 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने संगठन से बगावत की थी। उन्होंने बिना संगठन के चुनाव लड़ा। दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 1967 से हुई थी। पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आदर्श किशोर सक्सेना अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।
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बगावत के सुर राजनीति के गलियारों से लेकर छात्रों के बीच पैठ बना चुके हैं। एक नजर राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों पर डालें तो बागियों को जीत रास आती है। मतलब यह कि अब तक जितने भी छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए हैं, उनमें संगठन से बगावत करने वालों की संख्या काफी है। फिर चाहे एबीवीपी हो या एनएसयूआई, बगावत करने वाले प्रत्याशी छात्रों की पसंद भी बनते हैं।
अब तक 34 छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं, जिनमें से करीब 17 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने संगठन से बगावत की थी। उन्होंने बिना संगठन के चुनाव लड़ा। दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 1967 से हुई थी। पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आदर्श किशोर सक्सेना अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।
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एक मात्र महिला अध्यक्ष, वो भी निर्दलीय
राजस्थान यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
अध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाली अकेली छात्रा रही है प्रभा चौधरी। प्रभा ने साल 2011-12 में चुनाव जीत कर इतिहास बनाया था। प्रभा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और एबीवीपी और एनएसयूआई को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। वहीं, एबीवीपी ने अब तक 9 अध्यक्ष और एनएसयूआई 5 अध्यक्ष बना चुकी है।