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अजमेर: साल में 288 बार तोप दागती है ये बेटी, इसके बिना 'ईद' अधूरी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 26 Jun 2017 12:26 PM IST
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अपनी तोप के साथ अजमेर की फोजिया
- फोटो : amar ujala
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यूं तो जंग के मैदान में आपने कई जवानों को दुश्मनों पर तोप दागते देखा होगा लेकिन हम आपको बता रहे हैं राजस्थान के अजमेर शहर की एक ऐसी लड़की की दास्तां जो घरेलू काम काज के साथ-साथ तोप दागने का भी हुनर जानती है।
ये एक ऐसी बहादुर लड़की है जो कई सालों से तोप दाग कर अजमेर दरगाह की धार्मिक रस्मों का भी आगाज करती है। इस बेटी पर पूरा अजमेर शहर नाज करता है और इसे फोजिया तोपची के नाम से जाना जाता है।
एक और जहां ख्वाजा साहब की खिदमत को लोग तरसते हैं वहीं दूसरी और एक लड़की ऐसी भी है जो बचपन से ही ख्वाजा साहब की खिदमत गुजार है। ये कहानी है अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के ठीक सामने वाली पहाड़ी पर रहने वाली फोजिया खान की जो बचपन से ही ख्वाजा गरीब नवाज की खिदमत तोप दाग कर करती है। इसी की तोप की गरज से उर्स का आगाज होता है और दरगाह की कई रस्मों की शुरुआत भी होती है।
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ये एक ऐसी बहादुर लड़की है जो कई सालों से तोप दाग कर अजमेर दरगाह की धार्मिक रस्मों का भी आगाज करती है। इस बेटी पर पूरा अजमेर शहर नाज करता है और इसे फोजिया तोपची के नाम से जाना जाता है।
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एक और जहां ख्वाजा साहब की खिदमत को लोग तरसते हैं वहीं दूसरी और एक लड़की ऐसी भी है जो बचपन से ही ख्वाजा साहब की खिदमत गुजार है। ये कहानी है अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के ठीक सामने वाली पहाड़ी पर रहने वाली फोजिया खान की जो बचपन से ही ख्वाजा गरीब नवाज की खिदमत तोप दाग कर करती है। इसी की तोप की गरज से उर्स का आगाज होता है और दरगाह की कई रस्मों की शुरुआत भी होती है।
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साल में 288 बार तोप दागती है फोजिया
डेमो इमेज
साल में 288 बार तोप दागने वाली यह पहली लड़की है जो ये संदेश देती है की महिलाओं को भी इस्लाम में मर्द के सामान बराबरी का दर्जा दिया जाता है। देश की सानिया मिर्जा अगर अपने टेनिस के खेल में माहिर है तो फोजिया भी तोप दागने में बहुत फुर्तीली है।
दरगाह में जुम्मे की नमाज हो या फिर ईद की नमाज या फिर चाहे कोई दरगाह में खास मौका ही क्यों ना हो, ख्वाजा साहब के उर्स का झंडा भी फोजिया की तोप की आवाज के बाद ही चढ़ाया जाता है और उसके बाद ही उर्स शरू होने का ऐलान किया जाता है।
तोप चलाने की सदियों पुरानी इस परम्परा को फोजिया के बुजुर्ग ही निभाते चले आए हैं। मगर अब इस परम्परा की जिम्मेदारी फोजिया के कंधो पर है जो अपने नाजूक हाथों से भारी भरकम तोप में बारूद भर कर दागने को ख्वाजा साहब की खिदमत मानती है।
तोप चलाने के अलावा फोजिया अपने पूरे परिवार का भी ध्यान रखती है। तोप की गरज के साथ खेलने वाली फोजिया की एक छोटी सी दूकान भी है जहां पूरा दिन बैठ कर वो ख्वाजा पर बनें भजनों और कव्वालियों की सीडियां बेच लेती है और उसी से अपना घर खर्च चलाती है।
खास बात यह है की फोजिया का परिवार पिछली सात पीढ़ियों से तोप चलाने के काम को अंजाम देता आ रहा है। फोजिया के पिता अब इस दुनिया में नहीं है पर फोजिया के परिजन उसे बेटे की तरह मानते है जिसने उनका सिर फक्र से उंचा कर दिया है।
तोप दागने वाली इस बहादुर लड़की ने अपनी पूरी जिन्दगी ख्वाजा के नाम कर दी है और इसी तरह उम्र भर तोप दाग कर ख्वाजा की खिदमत करने का फैसला भी कर लिया है। यही वजह है की तोप दागने वाली फोजिया किसी सानिया मिर्जा,साइना नेहवाल या कल्पना चावला से कम नहीं है।
दरगाह में जुम्मे की नमाज हो या फिर ईद की नमाज या फिर चाहे कोई दरगाह में खास मौका ही क्यों ना हो, ख्वाजा साहब के उर्स का झंडा भी फोजिया की तोप की आवाज के बाद ही चढ़ाया जाता है और उसके बाद ही उर्स शरू होने का ऐलान किया जाता है।
तोप चलाने की सदियों पुरानी इस परम्परा को फोजिया के बुजुर्ग ही निभाते चले आए हैं। मगर अब इस परम्परा की जिम्मेदारी फोजिया के कंधो पर है जो अपने नाजूक हाथों से भारी भरकम तोप में बारूद भर कर दागने को ख्वाजा साहब की खिदमत मानती है।
तोप चलाने के अलावा फोजिया अपने पूरे परिवार का भी ध्यान रखती है। तोप की गरज के साथ खेलने वाली फोजिया की एक छोटी सी दूकान भी है जहां पूरा दिन बैठ कर वो ख्वाजा पर बनें भजनों और कव्वालियों की सीडियां बेच लेती है और उसी से अपना घर खर्च चलाती है।
खास बात यह है की फोजिया का परिवार पिछली सात पीढ़ियों से तोप चलाने के काम को अंजाम देता आ रहा है। फोजिया के पिता अब इस दुनिया में नहीं है पर फोजिया के परिजन उसे बेटे की तरह मानते है जिसने उनका सिर फक्र से उंचा कर दिया है।
तोप दागने वाली इस बहादुर लड़की ने अपनी पूरी जिन्दगी ख्वाजा के नाम कर दी है और इसी तरह उम्र भर तोप दाग कर ख्वाजा की खिदमत करने का फैसला भी कर लिया है। यही वजह है की तोप दागने वाली फोजिया किसी सानिया मिर्जा,साइना नेहवाल या कल्पना चावला से कम नहीं है।