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मां चाहती थी फौजी बने, लेकिन अब किस्सों-कहानियों में रह गया ये कुख्यात गैंगस्टर...

Thu, 13 Jul 2017 08:03 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 13 Jul 2017 08:03 PM IST
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story of gangster anandpal
आनंदपाल सिंह।
कुख्यात गैैंगस्टर आनंदपाल राजस्थान में डर का पर्याय बन गया था। पुलिस की नाक के नीचे से फरार होने के बाद आनंदपाल सरकार के लिए नाक का सवाल बन गया था। सरकार ने अपने बेहतरीन अधिकारियों को यह मामला सौंपा। उन्नीस दिन पहले आनंदपाल का एनकाउंटर हुआ और आज उसके पैतृक गांव नागौर जिले के सांवराद गांव में उसका अंतिम संस्कार।
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जानकारी के मुताबिक आनंदपाल की मां निर्मल कंवर और पिता हुकुम सिंह की ख्वाहिश थी कि वह फौजी बने। आनंदपाल सिंह मूल रूप से नागौर के लाडनूं तहसील के गांव सांवराद का रहने वाला था। आनंदपाल लोगों के लिए कुख्यात अपराधी और दहशत का दूसरा नाम था। एक वक्त वह बेहद सादा रहने वाला युवक था। वह उनके लिए ऐसा शख्स था जिसने गांव में कभी किसी से बेअदबी से बात तक नहीं की। फिर हालात बदले और आनंदपाल एक गैंग का सरगना बन गया।
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बीएड की डिग्री, फिर सीमेंट की दुकान और फिर प्रधान का चुनाव...रास्ते बदलते गए और उसके साथ आनंदपाल भी। कुछ ही सालों में आनंदपाल कुख्यात गैंगस्टर बन गया।
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राजनीति में चाहता था उतरना, हार गया था चुनाव

story of gangster anandpal
गैंगस्टर आनंदपाल - फोटो : File
आनंदपाल जवानी के दिनों में स्थानीय राजनीति में उतरना चाहता था। इस दौरान ही उस पर अलग अलग मामले दर्ज होते गए। इसके बाद उसका नाम  जीवन गोदारा हत्याकांड में उछला। फिर तो जैसे अपराधों का सिलसिला चल ही गया।

इस तरह एक आम जवान अपराध की दुनिया का एक कुख्यात नाम बन गया। आनंदपाल की मां निर्मल कंवर ने कहा भी था कि वह या तो सरेंडर कर दे या पुलिस उसे पकड़ ले। किसी एक की गलती की सजा सभी को देना गलत है।

साल 2000 में आनंदपाल ने प्रधानी का चुनाव  लड़ा, लेकिन हार गया। इसके बाद उस पर लूट और मारपीट के आरोप लगे। छह साल बाद गोदारा हत्याकांड से नाम चर्चा में आया। साल 2012 में गिरफ्तारी हुई।

वर्ष 13 सितम्बर 2015 को नागौर जिले के पर्बतसर में अदालत में पेश होकर लौटते समय पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर फरार हो गया था। तब से ही पुलिस को उसकी तलाश थी।

करीब एक वर्ष पहले नागौर में ही पुलिस ने उसे घेरा था। लेकिन फिर उसने पुलिस पर फायर किए, जिसमें एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। काफी तलाश के बाद 24 जून को पुलिस को उसका सुराग मिला और पक़ड़ने गई पुलिस पर उसने फिर फायरिंग की, जवाब में हुई पुलिस फायरिंग के दौरान मौके पर ही वह मारा गया।
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