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बूढ़ी मां की सुनी पुकार! घर लौटा साउदी जेल में बंद बेटा

Sat, 06 May 2017 07:20 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 06 May 2017 07:20 PM IST
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Son of a foreign prisoner returned a year later
नरेश सिंह रावत - फोटो : amar ujala
विदेश में अच्छे वेतन की नौकरी के लालच में आदमी कैसे जेल में पहुंच जाता है इसका ताजा उदाहरण है नेरश सिंह रावत। नरेश एक साल के संघर्ष के बाद आखिरकार अपने वतन लौट आया।
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दरअसल, ब्यावर के पास स्थित बलाइयों का कुआं, भीम निवासी 26 वर्षीय नरेश सिंह रावत ने बीएड की, ताकि उसे अच्छी नौकरी मिल जाए। काफी तलाशने पर भी जब परिवार को पालने के लिए नौकरी नहीं मिली तो वह पिछले साल जून में गुजरात में एक युवक से मिला मिला। उसने नरेश को 35 हजार रुपए हर महीने वेतन का लालच दिखाकर चालक वीजा पर सऊदी अरब के शहर तबूक के रहने वाले अबू हसन ढेर के पास भेज दिया। जैसे ही नरेश वहां पहुंचा और महीना होने पर उसने वेतन मांगा तो उसे केवल 20 हजार रुपए ही दिए गए।
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पूरा वेतन मांगा तो अबु हसन उसे धमकी देने लगा। यहां तक कि नरेश को झूठे मुकदमे में फंसाने तक की धमकी दे डाली। इसके बाद नरेश ने वहां से नौकरी छोड़ दी और वहीं किसी परिचित के घर चला गया। अब परेशान होकर नरेश ने अपने हक के लिए आवाज उठाने की ठानी और लेबर कोर्ट में मालिक अबू हसन के खिलाफ केस कर दिया।
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जैसे ही अबू हसन को इसका पता लगा तो उसने उल्टे उस पर 1.80 लाख का बकाया बताकर उसका पासपोर्ट अपने पास ही रख लिया। ऐसे में नरेश के सामने कोई रास्ता नहीं रहने पर उसने भारतीय दूतावास में समर्पण कर दिया, जहां से उसे भारत भेजने का आश्वासन मिला और बाद में जेद्दा जेल में भेज दिया गया।

बेटे के सदमे ने मां को पहुंचाया अस्पताल

Son of a foreign prisoner returned a year later
बेटे नरेश की फोटो के साथ माता—पिता
इस घटना से नरेश के बुजुर्ग पिता देवी सिंह और मां सीता देवी बिल्कुल टूट गए। परिजनों ने उसकी मदद के लिए कर्जा लेकर करीब डेढ़ लाख रुपए भी भिजवाए, लेकिन उसे पासपोर्ट नहीं मिल सका। भाई कमल सिंह ने बताया कि मां सीता देवी ये सदमा नहीं सह सकी और उन्हें हार्ट अटैक आ गया।

इसके बाद करीब एक महीने तक जेएलएन अस्पताल में मां भर्ती रही। हालात इतने विकट हो गए कि मां के बीमारी में पैसा लग रहा था और वहीं भाई के जेल में फंसे होने की सोचकर पिता को नींद भी नहीं आती। इधर मां और उधर नरेश दोनों एक—दूसरे की याद में रोते रहते।

धीरे—धीरे परिजनों ने हिम्मत जुटाई और जनप्रतिनिधियों सहित संगठनों से मदद के लिए मुलाकात की। इस दौरान अखिल भारत हिंदु क्रांति सेना सहित अन्य कई समाज सेवियों की पहल पर विदेश मंत्रालय और तत्कालीन मंत्री वीके सिंह से बात की।

इसके बाद जाकर नरेश को वतन वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। सेना के अध्यक्ष आनंद सोनी ने बताया कि समय गुजरता गया और ब्यावर में आंदोलन तेज होता गया। आखिरकार परिजनों की मेहनत और विदेश मंत्रालय का सहयोग रंग लाया। शुक्रवार रात को नरेश अपने वतन वापस लौट आया, जिसके बाद शनिवार को वह गांव पहुंच गया।

नरेश ने बताया कि जेद्दा जेल में करीब 500 बंदी है जिन्हें वतन वापसी का इंतजार है। नरेश ने खुद को खुशनसीब बताते हुए वतन वापसी के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया।

नरेश का कहना है कि डिग्री लेने के बाद भी नौकरी नहीं मिल पाना युवाओं के लिए मुसीबत बन गया है। इसी के चलते राजस्थान में सैकड़ों युवा कभी किसी ठग के झांसे में आते हैं तो कभी विदेशी नौकरी के। ऐसे में ये केवल मेरी कहानी नहीं है बल्कि हर उस शख्स के साथ घट सकती है जो नौकरी की तलाश में है। 
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