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तो इसलिए राजस्थान सरकार को दिया एनजीटी ने झटका
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 06 Mar 2017 02:29 PM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल ब्रांच ने बाड़मेर के कोरना गांव में प्रस्तावित पावर सबस्टेशन के मामले में झटका दिया है। जानकारी के अनुसार एनजीटी ने सरकार को पावर स्टेशन के लिए नई जगह तलाशने के लिए कहा है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से क्षेत्र में 400 बीघा जमीन पावर सब स्टेशन के लिए चिन्हित की थी। जिसका स्थानीय लोग लंबे समय से विरोध कर रहे थे। एनजीटी ने चिंता जताते हुए कहा है कि जो जमीन चिन्हित की गई वह विभिन्न प्रजाति के पक्षीयों का घर है।
साथ ही प्रवासी पक्षी भी इस क्षेत्र में आते है। यह बात एनजीटी ने क्षेत्र के फोटोग्राफ रिकॉर्ड के आधार पर कही है। एनजीटी ने आदेश में यह भी कहा है कि वहां के स्थाानीय लोग पशुपालक है। जिस भूमि को सरकार ने चिन्हित किया है उसके आसपास करीब 24 गांव है। जहां मवेशियों की संख्या करीब 9000 है। इसलिए चारागाह भूमि उस क्षेत्र के लिए आवश्यक है। हालांकि पूर्व में इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से समझाइश का प्रयास किया गया था। प्
रशासन का कहना था कि यह राष्ट्रीय हित का विषय है इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन ग्रामीणों का कहना है अगर यह पावर सब स्टेशन यहां बनता है तो क्षेत्र की जैव विविधता भी प्रभावित होगी। वहीं जोधपुर संभाग की जो सबसे बड़ी झील है गंगवास यह क्षेत्र उसका कैचमेंट एरिया भी है।
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साथ ही प्रवासी पक्षी भी इस क्षेत्र में आते है। यह बात एनजीटी ने क्षेत्र के फोटोग्राफ रिकॉर्ड के आधार पर कही है। एनजीटी ने आदेश में यह भी कहा है कि वहां के स्थाानीय लोग पशुपालक है। जिस भूमि को सरकार ने चिन्हित किया है उसके आसपास करीब 24 गांव है। जहां मवेशियों की संख्या करीब 9000 है। इसलिए चारागाह भूमि उस क्षेत्र के लिए आवश्यक है। हालांकि पूर्व में इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से समझाइश का प्रयास किया गया था। प्
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रशासन का कहना था कि यह राष्ट्रीय हित का विषय है इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन ग्रामीणों का कहना है अगर यह पावर सब स्टेशन यहां बनता है तो क्षेत्र की जैव विविधता भी प्रभावित होगी। वहीं जोधपुर संभाग की जो सबसे बड़ी झील है गंगवास यह क्षेत्र उसका कैचमेंट एरिया भी है।
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