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'श्रीराम' तीन साल से सऊदी जेल में बंद है, डेढ़ करोड़ हों तो छूटे, देश आने को तरसा

Thu, 12 Oct 2017 05:34 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 12 Oct 2017 05:34 PM IST
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Shriram in Saudi jail for last three years
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बीपीएल परिवार का 'श्रीराम' पिछले तीन साल से सऊदी जेल में बंद है और देश में आने को तरस रहा है। छुड़ाने के लिए वहां की सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। अब इतनी बड़ी रकम हो तो वह जेल से छूटकर देश वापस आ सके।
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मामला राजस्थान के झुंझुनूं जिले से जुड़ा हुआ है। यहां के खेतड़ी स्थित नौरंगपुरा ग्राम पंचायत के नेहरा की ढाणी का रहने वाला श्रीराम अपने परिवार को अच्छा जीवन देने के लिए कमाने सऊदी अरब गया था। पिता शिवसहाय ने बताया कि श्रीराम 15 फरवरी को 2013 को कमाने के लिए सऊदी अरब गया था। इसके लिए एजेंट को तीन लाख रुपए ब्याज पर लाकर दिए थे। वहां जाने के बाद सोचा कि अब जल्द ही दिन बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सऊदी अरब में श्रीराम बड़ा ट्रोला चलाता था। इसी दौरान वहां फरवरी 2014 में रोड एक्सीडेंट हो गया।
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इस एक्सीडेंट में तीन लोगों की मौत हो गई। इस पर कार्रवाई करते हुए सऊदी पुलिस ने श्रीराम को गिरफ्तार कर लिया और जेल में बंद कर दिया। वहां की कोर्ट ने श्रीराम पर इंडियन करेंसी अनुसार डेढ़ करोड़ रुपए का जुर्माना लगा दिया। अब पिता का कहना है कि जब यह जुर्माना अदा किया जाएगा तब ही बेटा श्रीराम जेल से मुक्ति पा सकेगा। परेशानी यह है कि उनका बीपीएल परिवार इतना रुपया कहां से लाए। ऐसे में उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
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पीएमओ तक लगाई गुहार

Shriram in Saudi jail for last three years
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रोते हुए पिता शिवसहाय बताते हैं कि गरीबी के चलते पेट पालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में वे कहां से डेढ़ करोड़ रुपए अदा करें। घर चलाने के लिए श्रीराम के बेट नरेश ने पढ़ाई छोड़ दी है और अब वह साढ़े तीन हजार की नौकरी करता है। पैसे की कमी के कारण बेटी शर्मिला की भी पढ़ाई छूट चुकी है। परिवार में श्रीराम की मां धनकोरी देवी और पत्नी संतोष का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

मां का कहना है कि वह जीते-जी बेटे का मुंह भी देख पाएंगे या नहीं। कोई तो उसे छुड़ाकर लाओ। उधर, बेटे नरेश ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय में भी तीन बार पत्र भेजे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर स्थानीय सांसद तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

उसका कहना है कि अब केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ही उम्मीद है कि वे कोई पहल करें ताकि उनके पिता भारत आ सकें।
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