{"_id":"597075b34f1c1bde618b48a5","slug":"shabby-school-jaisalmer","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आखिर क्यों! स्कूल में छात्राओं के सिर पर मंडराती है मौत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिर क्यों! स्कूल में छात्राओं के सिर पर मंडराती है मौत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 20 Jul 2017 03:21 PM IST
विज्ञापन
मिट्टी के कट्टे रखकर बनाते रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस स्कूल में आने वाली छात्राओं के सिर पर मौत का खतरा मंडराता रहता है। भवन जर्जर है, छतों से पानी रिसता रहता है, जिससे छत गिरने का खतरा बना रहता है। बारिश में स्कूल का रास्ता तक नहीं मिल पाता।
यह हकीकत जुड़ी हुई है जैसलमेर जिले के किशनी देवी मगनीराम मोहता राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय से। यहां बारिश के दौरान छात्राएं अनजाने डर के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। छतें टपकती रहने से छात्राओं को ये डर सताता रहता है कि कहीं कोई हादसा ना हो जाए।
हालात ये हैं कि पूरा स्कूल तालाब बन जाता है। हर जगह पानी भर जाता है। ऐसे में यहां कमरों तक जाने के लिए भी छात्राओं को मिट्टी के कट्टों पर से होकर गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन
इस बालिका विद्यालय में कुल 614 के करीब नामांकन है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग विद्यालय के जर्जर भवन में पढ़ाने का जोखिम उठा रहा है। यहां सबसे ज्यादा खतरा प्रारंभिक स्तर के कक्षा कक्षों को है।
विज्ञापन
यह हकीकत जुड़ी हुई है जैसलमेर जिले के किशनी देवी मगनीराम मोहता राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय से। यहां बारिश के दौरान छात्राएं अनजाने डर के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। छतें टपकती रहने से छात्राओं को ये डर सताता रहता है कि कहीं कोई हादसा ना हो जाए।
विज्ञापन
हालात ये हैं कि पूरा स्कूल तालाब बन जाता है। हर जगह पानी भर जाता है। ऐसे में यहां कमरों तक जाने के लिए भी छात्राओं को मिट्टी के कट्टों पर से होकर गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन
इस बालिका विद्यालय में कुल 614 के करीब नामांकन है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग विद्यालय के जर्जर भवन में पढ़ाने का जोखिम उठा रहा है। यहां सबसे ज्यादा खतरा प्रारंभिक स्तर के कक्षा कक्षों को है।
तालाब बन जाता है पूरा स्कूल
स्कूल में भर जाता है पानी
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार, पहले शिक्षा विभाग की ओर से जर्जर माध्यमिक विद्यालयों की मरम्मत एवं रखरखाव के तहत मेजर रिपेयरिंग के लिए 2 लाख व माइनर रिपेयरिंग के तहत 25 हजार रुपए दिए जाते थे। अब विभाग द्वारा पिछले दो साल से यह राशि भी विद्यालयों को जारी नहीं की गई है। ऐसे में जर्जर विद्यालयों की स्थिति और भी दयनीय हो गई है।
जैसलमेर के राबाउमावि विद्यालय में पिछले कई सालों से यह समस्या आम है कि थोड़ी सी बरसात होने के साथ ही पूरा विद्यालय तालाब बन जाता है। जिससे अध्ययनरत बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले लंबे समय से विद्यालय में इस संबंध में टेंडर कर मरम्मत करवाने की मांग उठ रही है, लेकिन कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
जैसलमेर के राबाउमावि विद्यालय में पिछले कई सालों से यह समस्या आम है कि थोड़ी सी बरसात होने के साथ ही पूरा विद्यालय तालाब बन जाता है। जिससे अध्ययनरत बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले लंबे समय से विद्यालय में इस संबंध में टेंडर कर मरम्मत करवाने की मांग उठ रही है, लेकिन कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।