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राजा ने सेनापति की बेटी के लिए क्यों बनवाई 7 मंजिला ईमारत!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:40 PM IST
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जयपुर में सात मंजिला इमारत 'सरगासूली'
- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान की धरती अजूबों से भरी है। यहां कई तरह की धरोहरें हैं, जो अपने आप में अनोखी कहानियां समेटे हैं। कहीं कहानियों में सच्चाई है, तो कहीं केवल किवदंतियां ही हैं।
राजधानी जयपुर में पुराने शहर के ठीक बीच में एक ऐसा ही एक टॉवर ईसरलाट या सरगासूली बना हुआ है, जो बना तो जीत की खुशी में था, लेकिन जुड़ा गया राजा की प्रेम कहानी के साथ। अब कई लोग यही जानते हैं कि एक राजा ने अपने सेनापति की बेटी को देखने के लिए सात मंजिला स्तंभ बनवाया था।
इतहासकार भले ही इससे इत्तेफाक नहीं रखते हों, लेकिन जयपुर के लोग राजा की इस प्रेम कहानी के चर्चे एक-दूसरे से करते आज भी सुनाई दे जाते हैं।
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राजधानी जयपुर में पुराने शहर के ठीक बीच में एक ऐसा ही एक टॉवर ईसरलाट या सरगासूली बना हुआ है, जो बना तो जीत की खुशी में था, लेकिन जुड़ा गया राजा की प्रेम कहानी के साथ। अब कई लोग यही जानते हैं कि एक राजा ने अपने सेनापति की बेटी को देखने के लिए सात मंजिला स्तंभ बनवाया था।
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इतहासकार भले ही इससे इत्तेफाक नहीं रखते हों, लेकिन जयपुर के लोग राजा की इस प्रेम कहानी के चर्चे एक-दूसरे से करते आज भी सुनाई दे जाते हैं।
जीत के साथ एक तरफा लगाव का भी प्रतीक है ये इमारत
यहां से दिखता है पूरा शहर
- फोटो : अमर उजाला
इतिहासकारों के अनुसार ईसरलाट का संबंध जयपुर के राजा रह चुके ईश्वरी सिंह से है। साल 1743 में महाराजा सवाई जयसिंह की मृत्यु के बाद उन्हें राजा बनाया गया। इस समय उनका सौतेला भाई माधोसिंह भी राजा बनना चाहता था।
माधोसिंह ने अपने मामा, उदयपुर के महाराणा और कोटा व बूंदी नरेशों के साथ मिलकर 1744 में जयपुर पर हमला कर दिया। लेकिन ईश्वरी सिंह के प्रधानमंत्री राजामल खत्री और धूला के राव ने करारा जवाब देते हुए हमला विफल कर दिया।
वर्ष 1748 में माधोसिंह ने उदयपुर के महाराणा, मल्हार राव होल्कर व कोटा, बूंदी, जोधपुर और शाहपुरा के नरेशों के साथ मिलकर फिर हमला बोला। जयपुर के नजदीक बगरू में लड़ाई हुई। जयपुर की सेना का नेतृत्व सेनापति हरगोविंद नाटाणी ने किया और जीत हासिल की। इसी जीत के उपलक्ष में राजा ईश्वरीसिंह ने 1749 में सात खण्डों की इस भव्य मीनार का निर्माण कराया।
लोगों में अब तक ये चर्चा है कि ये सात मंजिला इमारत जीत के साथ राजा का सेनापति की बेटी से एक तरफा लगाव का भी प्रतीक है। लोग बताते हैं कि इस इमारत से राजा सेनापति की बेटी को देखा करता था।
माधोसिंह ने अपने मामा, उदयपुर के महाराणा और कोटा व बूंदी नरेशों के साथ मिलकर 1744 में जयपुर पर हमला कर दिया। लेकिन ईश्वरी सिंह के प्रधानमंत्री राजामल खत्री और धूला के राव ने करारा जवाब देते हुए हमला विफल कर दिया।
वर्ष 1748 में माधोसिंह ने उदयपुर के महाराणा, मल्हार राव होल्कर व कोटा, बूंदी, जोधपुर और शाहपुरा के नरेशों के साथ मिलकर फिर हमला बोला। जयपुर के नजदीक बगरू में लड़ाई हुई। जयपुर की सेना का नेतृत्व सेनापति हरगोविंद नाटाणी ने किया और जीत हासिल की। इसी जीत के उपलक्ष में राजा ईश्वरीसिंह ने 1749 में सात खण्डों की इस भव्य मीनार का निर्माण कराया।
लोगों में अब तक ये चर्चा है कि ये सात मंजिला इमारत जीत के साथ राजा का सेनापति की बेटी से एक तरफा लगाव का भी प्रतीक है। लोग बताते हैं कि इस इमारत से राजा सेनापति की बेटी को देखा करता था।
खास मौंकों पर होती है अनोखी सजावट
तीन रंगों की रोशनी से सजावट
- फोटो : अमर उजाला
इतिहासकारों का कहना है कि जीत के प्रतीक इस सतम्भ का प्रचार लड़ाई में हारनेवालों ने गलत तरीके से किया। हारनेवाले रहे बूंदी से जुड़े चारण कवियों ने कहा कि राजा ईश्वरीसिंह ने सरगासूली का निर्माण सेनापति हरगोविंद नाटाणी की बेटी को देखने के लिए करवाया था।
चारण कवियों की बात इतनी प्रचारित हो गई कि आज भी उसके चर्चे होते हैं। जयपुर अाने वाले सैलानियों के बीच में ईसरलाट काफी प्रसिद्ध हैं।
यहां आकर सैलानी पूरे शहर का नजारा देखने और कैमरे में कैद करना नहीं भूलते। जयपुर में खास मौकों इस ईमारत को खास रोशनी से सजाया जाता है।
चारण कवियों की बात इतनी प्रचारित हो गई कि आज भी उसके चर्चे होते हैं। जयपुर अाने वाले सैलानियों के बीच में ईसरलाट काफी प्रसिद्ध हैं।
यहां आकर सैलानी पूरे शहर का नजारा देखने और कैमरे में कैद करना नहीं भूलते। जयपुर में खास मौकों इस ईमारत को खास रोशनी से सजाया जाता है।