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Savan Special: एक शिवमंदिर जहां मिलता है पापमुक्ति का CERTIFICATE
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 24 Jul 2017 05:24 PM IST
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रसीद की फोटो
- फोटो : फाइल फोटो
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सावन में भोले की पूजा का खास महत्व है। मान्यता है कि उनकी पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती है। आज हम ऐसे आज एक ऐसे शिव मंदिर की जानकारी दे रहे है जहां भक्तों को पाप मुक्ति का सर्टिफिकेट मिलता है।
यह शिव मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले स्थित है। पाप मोचन तीर्थस्थल के रूप में फेमस गौतमेश्वर महादेव के बारे में मान्यता है कि यहां दर्शन से भक्तों को पाप मुक्ति मिलती है और भी सर्टिफाइड तरीके से।
इस मंदिर में एक कुंड है, जिसे मंदाकिनी कुंड के नाम से जाना जाता है। इस कुंड में डुबकी लगाने वालों को पाप-मुक्त होने का सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके बदले में श्रद्धालुओं को 11 रुपए देने होते हैं। इसमें एक रुपया सर्टिफिकेट के लिए और बाकी 10 रुपए दोष निवारण के लिए जाते है।
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यह शिव मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले स्थित है। पाप मोचन तीर्थस्थल के रूप में फेमस गौतमेश्वर महादेव के बारे में मान्यता है कि यहां दर्शन से भक्तों को पाप मुक्ति मिलती है और भी सर्टिफाइड तरीके से।
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इस मंदिर में एक कुंड है, जिसे मंदाकिनी कुंड के नाम से जाना जाता है। इस कुंड में डुबकी लगाने वालों को पाप-मुक्त होने का सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके बदले में श्रद्धालुओं को 11 रुपए देने होते हैं। इसमें एक रुपया सर्टिफिकेट के लिए और बाकी 10 रुपए दोष निवारण के लिए जाते है।
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रखा जाता है पूरा रिकॉर्ड
स्नान करते हुए श्रद्धालु
- फोटो : डेमो पिक
गौतमेश्वर महादेव से जिन लोगों को पाप मुक्ति सर्टिफिकेट जारी होता है, उनका रिकॉर्ड भी रखा जाता है। बताया जाता है कि यहां पर आजादी के बाद से अब तक जारी किए सर्टिफिकेट का रिकॉर्ड सुरक्षित है।
आदिवासी इलाके में स्थित गौतमेश्वर मंदिर को इस इलाके में हरिद्वार की तरह पूजनीय माना जाता है। यह मंदिर सदियों पुराना है और जनजाति समुदाय के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का नाम गौतम ऋषि के नाम से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक जानवर को मारने पर गौतम ऋषि को श्राप मिला था। उन्हें इस कुंड में स्नान के बाद श्राप से मुक्ति मिली थी। सावन में इस मंदिर में शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व माना गया है।
आदिवासी इलाके में स्थित गौतमेश्वर मंदिर को इस इलाके में हरिद्वार की तरह पूजनीय माना जाता है। यह मंदिर सदियों पुराना है और जनजाति समुदाय के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का नाम गौतम ऋषि के नाम से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक जानवर को मारने पर गौतम ऋषि को श्राप मिला था। उन्हें इस कुंड में स्नान के बाद श्राप से मुक्ति मिली थी। सावन में इस मंदिर में शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व माना गया है।