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आय से अधिक संपत्ति:रिटायर्ड SC को 4 साल की जेल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 06 Jun 2017 04:27 PM IST
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रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता आंनदी लाल माथुर
- फोटो : amar ujala
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कोटा की एसीबी कोर्ट ने मंगलवार को 18 साल पुराने आय अधिक सम्पति रखने के मामले में फैसला सुनाते हुए विद्युत विभाग के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता को 4 साल कैद की सजा सुनाई है,साथ ही 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया है। मामला सन 1999 में का है जब आरोपी आंनदी लाल माथुर ने बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर रहते हुए इन्द्रसिंह नाम के ठेकेदार से 3 हजार रूपए की कमीशन के रूप में रिश्वत ली थी।
एसीबी ने माथुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद घर पर दबिश के दौरान एसीबी को आय अधिक सम्पति भी मिली थी।जिसके बाद से मामला कोर्ट में विचाराधीन था अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने आय से अधिक सम्पति मामले 4 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया है। यहीं नहीं कोर्ट ने चल अचल संपति 11 लाख 96 हजार 459 रूपए भी जमा कराने के आदेश दिए हैं। आज जब आरोपी आनंदी लाल को सजा सुनाएं जाने के बाद जेल जाया जा रहा था वह लड़खड़ाते हुए पुलिस वाहन में बैठे।
रिश्वत के मामले में पूर्व में हो चुके हैं दोषमुक्त
सरकारी वकील अहसान अहमद ने बताया कि 1999 में रिश्वत के मामले में एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट ने आरोपी आनंदी लाल माथुर को रिश्वत लेने के आरोप में दोषमुक्त कर दिया था लेकिन 18 साल तक कोर्ट में आय से अधिक सम्पति रखने का मामला चला, जिसमें कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।
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एसीबी ने माथुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद घर पर दबिश के दौरान एसीबी को आय अधिक सम्पति भी मिली थी।जिसके बाद से मामला कोर्ट में विचाराधीन था अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने आय से अधिक सम्पति मामले 4 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया है। यहीं नहीं कोर्ट ने चल अचल संपति 11 लाख 96 हजार 459 रूपए भी जमा कराने के आदेश दिए हैं। आज जब आरोपी आनंदी लाल को सजा सुनाएं जाने के बाद जेल जाया जा रहा था वह लड़खड़ाते हुए पुलिस वाहन में बैठे।
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रिश्वत के मामले में पूर्व में हो चुके हैं दोषमुक्त
सरकारी वकील अहसान अहमद ने बताया कि 1999 में रिश्वत के मामले में एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट ने आरोपी आनंदी लाल माथुर को रिश्वत लेने के आरोप में दोषमुक्त कर दिया था लेकिन 18 साल तक कोर्ट में आय से अधिक सम्पति रखने का मामला चला, जिसमें कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।
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