{"_id":"59b7e9fa4f1c1bef7f8b6515","slug":"retired-officers-do-not-have-commitment","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेवानिवृत्त अधिकारियों में प्रतिबद्धता नहीं होती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेवानिवृत्त अधिकारियों में प्रतिबद्धता नहीं होती
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 12 Sep 2017 07:37 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : Pintrest
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के लंबित मामलों के मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों में प्रतिबद्धता नहीं होती। इसके अलावा अधिकरण का फोकस केवल ट्रांसफर के मामलों की सुनवाई पर ही है। अदालत ने राज्य सरकार तीस अक्टूबर तक बताने को कहा है कि अधिकरण में कितने पद स्वीकृत हैं।
न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश यह आदेश सोहनलाल मीणा के स्थानान्तरण से जुडे मामले में सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया ने अदालती आदेश की पालना में रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में वर्ष 2012 से 2017 तक की अवधि में निस्तारित किए मुकदमों की जानकारी दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2017 में कुल 1 हजार 470 मामले तय हुए। इसमें से 1 हजार 076 मामले ट्रांसफर के थे। इसी तरह 2016 में 1520 ट्रांसफर व 34 अन्य मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं वर्ष 2015 में 1214 प्रकरण ट्रांसफर व 35 अन्य मामलों का निस्तारण हुआ। रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत ने कहा कि अधिकरण का फोकस ट्रांसफर मामलों पर अधिक है।
अदालत ने कहा कि भेदभाव किए बिना ट्रांसफर के संबंध में गाइड लाइन तय होनी चाहिए। इसके अलावा अदालत ने अधिकरण में दो समानान्तरण पीठ की आवश्यकता भी जताई। अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी में प्रतिबद्धता और जवाबदेही नहीं होती है। इस पर वकीलों ने कहा कि उपभोक्ता अदालतों में भी सेवानिवृत्त अफसरों को ही नियुक्ति दी गई है। अदालत ने अधिकरण के स्वीकृत पदों के जानने की मंशा जताई। इस पर वकीलों ने कहा कि चैयरमेन के अलावा पांच सदस्यों ने पूर्व में यहां काम किया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी पेश करने के लिए समय मांगा गया।
विज्ञापन
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तीस अक्टूबर तक स्वीकृत पदों के संबंध में जानकारी पेश करने को कहा है।
विज्ञापन
न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश यह आदेश सोहनलाल मीणा के स्थानान्तरण से जुडे मामले में सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया ने अदालती आदेश की पालना में रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में वर्ष 2012 से 2017 तक की अवधि में निस्तारित किए मुकदमों की जानकारी दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2017 में कुल 1 हजार 470 मामले तय हुए। इसमें से 1 हजार 076 मामले ट्रांसफर के थे। इसी तरह 2016 में 1520 ट्रांसफर व 34 अन्य मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं वर्ष 2015 में 1214 प्रकरण ट्रांसफर व 35 अन्य मामलों का निस्तारण हुआ। रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत ने कहा कि अधिकरण का फोकस ट्रांसफर मामलों पर अधिक है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि भेदभाव किए बिना ट्रांसफर के संबंध में गाइड लाइन तय होनी चाहिए। इसके अलावा अदालत ने अधिकरण में दो समानान्तरण पीठ की आवश्यकता भी जताई। अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी में प्रतिबद्धता और जवाबदेही नहीं होती है। इस पर वकीलों ने कहा कि उपभोक्ता अदालतों में भी सेवानिवृत्त अफसरों को ही नियुक्ति दी गई है। अदालत ने अधिकरण के स्वीकृत पदों के जानने की मंशा जताई। इस पर वकीलों ने कहा कि चैयरमेन के अलावा पांच सदस्यों ने पूर्व में यहां काम किया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी पेश करने के लिए समय मांगा गया।
विज्ञापन
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तीस अक्टूबर तक स्वीकृत पदों के संबंध में जानकारी पेश करने को कहा है।