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रविश कुमार और सांकेत के खिलाफ परिवाद खारिज

Fri, 09 Jun 2017 07:57 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 09 Jun 2017 07:57 PM IST
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Ravish Kumar and Sanket dismissed libel
जयपुर महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-17 ने टीवी पत्रकार रविश कुमार और सांकेत उपाध्याय की ओर से न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में पेश परिवाद को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा है कि परिवाद पेश करने से पहले सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत पुलिस में मामला दर्ज कराने का प्रयास नहीं किया गया है। इसके अलावा अदालत ने क्षेत्राधिकार भी नहीं माना है।
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परिवादी अधिवक्ता सीसी रत्नू की ओर से कहा गया कि गत दिनों हाईकोर्ट न्यायाधीश महेशचन्द्र शर्मा ने अपने अंतिम कार्यदिवस पर गायों के संरक्षण को लेकर आदेश पारित किया था। आदेश के बाद रविश कुमार ने सुझाव दिया कि जब कोई जज बने तो उसे ट्रेनिंग में चिड़ियाघर ले जाना चाहिए और बताना चाहिए कि कौनसा पशु कैसे प्रजनन करता है और कौनसा पक्षी आजीवन ब्रह्मचारी है व योग करता है। वहीं एक अन्य सांकेत उपाध्याय ने न्यायाधीश को पिकॉज जज और काऊ जज के नाम से संबोधित किया।
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परिवाद में कहा गया कि न्यायाधीश शर्मा ने आध्यात्मिक तौर पर मोर के प्रजनन की बात कही थी। आध्यात्म निजी भाव है, कोई भी व्यक्ति इसे मानने या ना मानने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन किसी को आध्यात्म का मखौल उडाने का अधिकार नहीं है। उच्चतम न्यायालय व अन्य हाईकोर्ट में समय-समय पर धार्मिक ग्रंथों के श्लोक आदि का न्यायिक निर्णयों में समावेश होता है। दोनों आरोपियों ने जन मानस में न्यायपालिका की छवि बिगाड़ने का काम किया है।
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