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90 दिन बाद बेटे का शव देख बिलख पड़ी मां, अंतिम यात्रा में नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि

Sat, 20 May 2017 02:17 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 20 May 2017 02:17 PM IST
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rajudas deadbody reached in paternal village
राजूदास का शव - फोटो : amar ujala
विदेश में नौकरी करने गए बेटे का तीन महीने से इंतजार करने के बाद इस हाल में देखकर बूढ़ी मां फफक पड़ी। बच्चे रोने—बिलखने लगे और पत्नी बेसुध होकर गश खाकर गिर गई। ये सभी परिजन राजूदास का इंतजार कर रहे थे जिनका सब्र उसे मरा देखकर टूट गया।
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बाड़मेर के काशमीर में बाड़ी गांव का रहने वाला राजूदास सऊदी अरब में कमाने गया था। वहां इसी साल 19 फरवरी को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने राजूदास का शव भारत लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पीएमओ और विदेश मंत्रालय में गुहार लगाई। इसके तहत भारत सरकार के सहयोग से आखिरकार बीती शाम राजूदास का शव भारत लाया गया। जैसे ही राजूदास का शव उसके परिजनों के पास घर पहुंचा, मां फूटफूटकर रोने लगी और पत्नी बेसुध हो गई। ऐसा हृदय विदारक दृश्य देखकर उपस्थित सब लोगो के आंखें नम हो गई।
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इस दौरान उनके पास कोई भी जनप्रतिनिधि संबल बंधाने के लिए मौजूद नहीं था। आस—पड़ोस के लोगों ने ही पूरे परिवार को सांत्वना देते हुए संभाला। हालांकि, जैसे ही राजूदास का शव भारत आने की खबर पुख्ता होने के सूचना स्थानीय नेताओं को मिली, हर कोई अपने प्रयास गिनाने लगे।
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बायतु विधायक कैलाश चौधरी भी जयपुर एयरपोर्ट पर ही राजूदास के शव को लेने पहुंचे, उसके गांव परिजनों से मिलने नहीं गए। राजूदास की अंतिम यात्रा में भी कोई जनप्रतिनिध या प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। आसपास के सैकड़ों ग्रामीण उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे, लेकिन सभी को जनप्रतिनिधियों की कमी जरूर खली। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों में भी इस बात की चर्चा रही।


गौरतलब है राजूदास की मौत की खबर के बाद से ही मां धापु देवी और पिता भगवानदास सहित पत्नी गुड्डी की हालत दयनीय बनी हुई थी। यह परिवार बेटे का शव नहीं मिलने के कारण पिछले तीन महीने से शोक मना रहा था। इस दौरान इनके घर में चूल्हा तक नहीं जला। यहां तक कि आसपड़ोस के लोग ही उनके खाने का इंतजाम कर रहे थे।
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