{"_id":"5a22300a4f1c1bc45b8b9b72","slug":"rajsthan-get-second-position-in-human-trafficking-case-in-country","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लगातार हो रही है यहां से मानव तस्करी, जानें क्यों...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लगातार हो रही है यहां से मानव तस्करी, जानें क्यों...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:16 AM IST
विज्ञापन
human trafficking
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानव तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल का नाम सबसे उपर है। लेकिन राजस्थान भी इस लिस्ट में पीछे नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा के अनुसार मानव तस्करी में राजस्थान दूसरे नंबर पर है। वर्ष 2016 में मानव तस्करी के राजस्थान में 1422 मामले सामने आए थे।
जबकि पश्चिम बंगाल में 3579 केस रजिस्टर्ड किए गए। मानव तस्करी के बढ़ते मामले राजस्थान पुलिस के लिए चुनौती बने हुए। पुलिस जांच में यह सामने आया है जहां पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी के पीछे कारण देह व्यापार है। वहीं राजस्थान में बाल या बंधुआ मजदूरी के लिए मानव तस्करी की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान से लड़कियों के स्थान पर लड़कों की तस्करी अधिक की जा रही है।
विज्ञापन
जबकि पश्चिम बंगाल में 3579 केस रजिस्टर्ड किए गए। मानव तस्करी के बढ़ते मामले राजस्थान पुलिस के लिए चुनौती बने हुए। पुलिस जांच में यह सामने आया है जहां पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी के पीछे कारण देह व्यापार है। वहीं राजस्थान में बाल या बंधुआ मजदूरी के लिए मानव तस्करी की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान से लड़कियों के स्थान पर लड़कों की तस्करी अधिक की जा रही है।
विज्ञापन
नहीं थम रही मानव तस्करी
human trafficking
- फोटो : google
इस क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ बताते है कि राजस्थान के कई जिले ऐसे है जहां से नाबालिग लड़कों को गुजरात व अन्य राज्यों में बाल मजदूरी के लिए ले जाया जाता है। इसके बाद मानव तस्करी के दूसरे कारणों में देह व्यापार सम्मलित है। गौरतलब है कई संस्थाओं के सहयोग से राजस्थान पुलिस की स्पेशल यूनिट बाल मजदूरी व देह व्यापार में फंसे नाबालिग या बड़ों को मुक्त कराने के लिए अभियान चलाती है। हाल में मिलाप कार्यक्रम की मदद से बच्चों को अपने परिवारों के पास भी भेजा गया है।