फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan needs more money to implement the new education policy, the minister raised the issue of additional

Rajasthan: नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए राजस्थान को चाहिए और पैसा, मंत्री ने उठाया अतिरिक्त बजट का मुद्दा

Wed, 15 Mar 2023 03:42 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Wed, 15 Mar 2023 03:42 PM IST
सार

राजस्थान में नई शिक्षा नीति लागू करने के मुद्दे पर शिवचरण माथुर सोशल पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षा मंत्री कल्ला ने कहा कि नई नीति लागू करने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है।  

विज्ञापन
Rajasthan needs more money to implement the new education policy, the minister raised the issue of additional
सेमिनार को संबोधित करते हुए कल्ला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बेहतर तरीके से क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत है। इससे स्कूलों में संसाधनों का विकास होगा। नई नीति जारी हुए दो साल हो गए, लेकिन केन्द्र सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई अतिरिक्त बजट जारी नहीं किया है।

विज्ञापन


शिक्षा मंत्री कल्ला बुधवार को यहां झालाना स्थित शिवचरण माथुर सोशल पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के राजस्थान में क्रियान्वयन को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा को निजी शिक्षण संस्थाओं के पैटर्न पर लाने का प्रयास किया है, किंतु ये हकीकत है कि अभी तक दो सालों तक कोई बजट नहीं आया। पढ़ाने वालों की ट्रेनिंग कैसे होगी? प्री-प्राइमरी में स्कूलों में आधारभूत ढांचा कैसा होगा? इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि आजकल कॉन्सेप्ट यह आ गया है कि शिक्षा को जॉयफुल बनाएं। पढ़ने में आनंद की अनुभूति हो। खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाएं। यह पक्ष तो अच्छा है, लेकिन इसके लिए तैयारी पूरी नहीं है। जैसे शिक्षकों को ट्रेनिंग नहीं है। वैसा ही आधारभूत ढांचा तैयार होना चाहिए। 
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


राजस्थान में शुरू कीं बाल वाटिकाएं 
डॉ. कल्ला ने कहा कि राजस्थान में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर पूरी तैयारी है। चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। जिला स्तर पर भी कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटियां हैं। अलग-अलग कोर ग्रुप के हिसाब से छह कमेटियां हैं। राजस्थान में 1133 स्कूलों में बाल वाटिका बनाकर प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू कर दी है। महात्मा गांधी स्कूलों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रोत्साहन देना चाहते हैं। स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की जरूरत है। तभी ज्यादा से ज्यादा बच्चों को रोजगार मिलेगा। नई शिक्षा नीति में वैज्ञानिक शोध की बात कही गई है। वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है। इंस्पायर अवॉर्ड में राजस्थान पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में नंबर वन आ रहा है। फिट इंडिया में नंबर वन हैं। 

संस्कार निर्माण के केन्द्र बनें स्कूल 
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चे को पढ़ने में आनंद की अनुभूति होनी चाहिए। आजकल बच्चा रटकर पास हो रहा है। वनवीक सीरीज, वनमंथसीरीज जैसी चीजें पढ़कर पास हो रहा है। यह सब बंद होनी चाहिए। बच्चों का मासिक रिव्यू होना चाहिए। साथ ही अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं नियमित होनी चाहिएं। बच्चों की आदतें बदल रही है। बच्चों को किताबी ज्ञान ही नहीं देना, उसे व्यवहारिक ज्ञान देना है। साथ-साथ संस्कार भी देना है। यह तब ही होगा, जब हम अपने शिक्षकों को आदर्श शिक्षक बनाए, तभी यह संभव होगा। व्यसनमुक्त समाज की सरंचना तब ही साकार होगी, जब शिक्षक व्यसनमुक्त होगा।  

 
डिजिटल कंटेंट पर जोर 
डॉ. कल्ला ने कहा कि आजकल डिजिटल कंटेट पर जोर है। नई शिक्षा नीति में राष्ट्रीय मूल्यांकन केन्द्र की स्थापना की बात कही गई है। यह अच्छी बात है। शिक्षकों के लिए मानक बनाई जानी चाहिए। डिजिटल पुस्तकालय होना चाहिए। केन्द्र सरकार योजना बनाती है, लेकिन उसे क्रियान्वित करना मुश्किल है। इसके लिए संसाधनों की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति के तहत अभी किसी भी राज्य को बजट नहीं मिला है। यह मिलना चाहिए।

तीन सत्रों में नई शिक्षा नीति पर मंथन 
शिवचरण माथुर सोशल पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक व सेमिनार के समन्वयक डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि  सेमिनार को पूर्व आईएएस व शिक्षाविद् प्रदीप बोरड़, राजस्थान सरकार के समसा कमिश्नर एम.एल. यादव और यूनिसेफ राजस्थान की चीफ इशाबेल बार्डेम ने भी संबोधित किया। तिवारी ने बताया कि सेमिनार के प्रथम सत्र में 'शैक्षणिक संरचना का पुनर्गठन', दूसरे सत्र में 'बुनियादी शिक्षा और निपूर्ण भारत' और तीसरे सत्र में 'शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और समसामयिक बनाने के लिए डिजिटल टूल्स का बेहतर उपयोग कैसे हो' इस पर मंथन हुआ।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed