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नहीं रहा 'लव', देर रात ली अंतिम सांस
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 26 Dec 2017 03:53 PM IST
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जोधपुर जंतुआलय में लव ने ली आखिरी सांस
- फोटो : Amar Ujala
कई साल से सैलानियों का आकर्षण का केंद्र रहे लव ने कल देर रात आखिर सांस ली। जोधपुर के माचिया पार्क में 20 साल का यह बब्बर शेर पिछले कई दिन से बीमार चल रहा था।
उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। देर रात उसने दम तोड़ दिया। पशुचिकित्सकों के बोर्ड ने उसका पोस्टमार्टम किया। करीब 17 साल पहले साढ़े तीन वर्ष के लव को कोटा जू से जोधपुर जू में लाया गया था। यहां उम्मेद उद्यान स्थित जू में बरसों तक लव ने एकाकी जीवन व्यतीत किया। दो साल पहले उसे माचिया में शिफ्ट कर दिया गया था। उसका जोड़ा बनाने का प्रयास किया और उसके लिए शेरनी गोरी को लाया गया, लेकिन बढ़ती उम्र बाधा बन गई।
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उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। देर रात उसने दम तोड़ दिया। पशुचिकित्सकों के बोर्ड ने उसका पोस्टमार्टम किया। करीब 17 साल पहले साढ़े तीन वर्ष के लव को कोटा जू से जोधपुर जू में लाया गया था। यहां उम्मेद उद्यान स्थित जू में बरसों तक लव ने एकाकी जीवन व्यतीत किया। दो साल पहले उसे माचिया में शिफ्ट कर दिया गया था। उसका जोड़ा बनाने का प्रयास किया और उसके लिए शेरनी गोरी को लाया गया, लेकिन बढ़ती उम्र बाधा बन गई।
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लव
- फोटो : Amar Ujala
माचिया के अधिकारियों का कहना है कि लव कुछ दिन पूर्व बीमार पड़ गया था। बुढ़ापे के कारण उसकी चमड़ी गलना शुरू हो गई थी। साथ ही एक सप्ताह से वह चल भी नहीं पा रहा था। लेटे-लेटे वह कुछ तरल पदार्थ अवश्य चाट लेता था। इस बीच एक-एक कर उसके विभिन्न अंगों ने जवाब देना शुरू कर दिया।
माचिया में उसका इलाज करने वाले डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि हमने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उसे बचा नहीं पाए। जंगलों में रहने वाले शेर अमूमन पंद्रह से सत्रह वर्ष तक जिंदा रहते है, लेकिन जन्तुआलय में अच्छी केयर होने के कारण शेरों की उम्र तीन से पांच साल बढ़ जाती है। लव भी बीस साल और छह माह का था।
माचिया में उसका इलाज करने वाले डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि हमने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उसे बचा नहीं पाए। जंगलों में रहने वाले शेर अमूमन पंद्रह से सत्रह वर्ष तक जिंदा रहते है, लेकिन जन्तुआलय में अच्छी केयर होने के कारण शेरों की उम्र तीन से पांच साल बढ़ जाती है। लव भी बीस साल और छह माह का था।